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हिंदी काव्य - खून तेरा है लाल लाल खून उसका भी फिर छूत अछूत काहेका पागल

छूत अछूत काहेका पागल यह इसीलिए लिखा क्यूंकि एक तरफ देश २१वि सदी की और जा रहा है मगर कुछ मंदबुद्धि के लोग १७ वि सदी की सोच रखे हुए है, कई लोग ऐसे है जो आज भी कुछ जाती के लोगो को छू लेते है तो घर पर आकर नहाने बैठ जाते है या उस व्यक्ति की पिटाई कर देते है, यह एक घटिया सोच है,मेरा ऐसे लोगो से कहना है की क्या जब भी आप बीमार होते है पराया खून लेने की जरूरत होती है तो क्या जात और धर्म पूछकर खून लेते है ? क्या कोई होटल में खाना खाने जाते है तो वह खाना परोसने वाले का नाम पूछते है? नहीं ना? फिर यह छूत अछूत काहे का ?




खून तेरा है लाल लाल खून उसका भी                                                                   

छूत अछूत काहेका पागल, छूत अछूत काहेका
खून तेरा  है लाललाल खून उसका भी
तु जो बोले बोल बोल वह बोले,
तू जो खाये धान धान वह खाये  
फिर छूत अछूत काहेका पागल  छूत अछूत काहेका

सुनले ध्यान से अब जरा आज  ये कटु सत्य,,,,,2 
तुम्हे जन्म देते वक्त माँ के खून के धब्बे वाली चद्दर वो धोए                               
और तु अछूत उसे कहता हे ?
जन्म लेते हो तब तुम्हारे शरीर पे लगे खून के धब्बे  वह धोए 
और तु अछूत उसे कहता  है   ?
स्कुल में साथ बैठ कर ,, पढ़ने वाला तेरा वो दोस्त   
और तु अछूत उसे कहता  है  ?
जब छोड़ते हो तुम प्राणतब तुम्हारी चिता को तैयार वह करे 
और तु अछूत उसे कहता  है   ?
बुझी हुई चिता से तुम्हारी अस्थिया टटोल कर वह निकाले  
और तु अछूत उसे कहता है   ?
मनुष्य तो पहले बंदर था कभी देखा तूने बंदर में जात पात  
और तु अछूत उसे कहता है  ?
खून तेरा  है लाललाल खून उसका भी
तु जो बोले बोल बोल वह बोले,
तू जो खाये धान धान वह खाये  
फिर छूत अछूत काहेका पागल  छूत अछूत काहेका

कुसूर उसका उतना है की ....2

तु डाले कूड़ा कूड़ा वो उठाए, शहर गांव गलियारे सफाई वो करे 
तभी....  तु अछूत उसे कहता  है   ?
दिल नहीं सोचले दिमाक से आज,,,,,,,,,,2
राम ने  जूठे बेर खायोकृष्ण ने गले लगायो
वाल्मीकि ने रामायण लिखी,पंडित उसे पूजे
दलित ने संविधान लिखोहर कोई उसे माने 
ईश्वर ने तो ना अछूत मानो फिर तू काहे का उलझा पागल,   
तू काहे का उलझा 
खून तेरा  है लाललाल खून उसका भी
तु जो बोले बोल बोल वह बोले,
तू जो खाये धान धान वह खाये  
फिर छूत अछूत काहेका पागल, छूत अछूत काहेका,,,
                              
By-  Raju Somabhai Patel
                               
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