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अयोध्या राम मंदिर ई.स 1528 से ऑगस्ट 05-2020 भूमि पूजन तक


1528 में राम मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद बनी,Ram Mandir को बचाने अविरत प्रयत्न होते रहे,कई लोगो ने अपने प्राणो आहुति भी दी,मगर पहली बार राम मंदिर -बाबरी मस्जिद मुद्दे पर 1853 हिन्दू -मुस्लिम  के बिच  दंगे हुए, और तब British Government था,हिंदुओं के दावे के बाद से विवादित जमीन पर नमाज के साथ-साथ पूजा भी होने लगी,एक टाट में राम लला थे, इसके बाद भी 1855 तक दोनों पक्ष एक ही स्थान पर पूजा और नमाज अदा करते रहे, 1855 के बाद मुस्लिमों को मस्जिद में प्रवेश करने की  इजाजत थी, लेकिन हिंदुओं को अंदर जाने की मनाही थी, ऐसे में हिंदुओं ने मस्जिद के मुख्य गुम्बद से 150 फीट दूर बनाए राम चबूतरे पर पूजा शुरू की,मगर हिन्दू दुखी थे वह राम जन्म स्थल पर पूजा करने का प्रयत्न करते रहे,आखिर अयोध्या राम मंदिर ई.स 1528 से ऑगस्ट 05-2020 भूमि पूजन तक क्या और कैसे घटनाए घटी उसका विवराण हर हिन्दू को जानना चाहिए,
babri masjid demolition
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अयोध्या राम मंदिर ई.स 1528 से ऑगस्ट 05-2020 भूमि पूजन तक  कौन से साल में क्या हुआ विवादित स्थल को स्वतंत्रता दिलाने के लिए :

-इसके बाद सन् 1857 की विद्रोह के दौरान  बाबा रामचरण दास ने एक मौलवी आमिर अली के साथ जन्मभूमि के उद्धार का प्रयास किया जिसका कट्टरपंथी मुस्लिमों ने विरोध किया,
-विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा था इसके चलते  1859 में ब्रिटिश सरकार ने विवादित जगह पर तार की बाड़ लगवाई,और आदेश दिया की परिसर के अंदर के हिस्से में मुसलमान नमाजपढ़े,और हिन्दू बाहरी हिस्से में प्रार्थना करे,हिन्दू मायूस हुए इस फैसले से, फिर बरसो बाद वापस कोर्ट में मामला आया,
-19 January 1885 को हिन्दू महंत रघुबीर दास ने पहली बार इस मामले को फैजाबाद कोर्ट के न्यायाधीश पं. हरिकिशन के सामने रखा, इस मामले में कहा गया था कि मस्जिद की जगह पर मंदिर बनवाना चाहिए, क्योंकि वह स्थान प्रभु श्री राम का जन्म स्थान है मगर कारण वश फैसला नहीं हो पाया,
-अतः 1934 में हिन्दुओ के सब्र का बाँध टुटा, अयोध्या में हिन्दू मुस्लिम के बिच दंगे भड़के और बाबरी मस्जिद का कुछ हिस्सा तोड़ दिया गया तब से उसे ब्रिटिश सरकार द्वारा विवादित स्थल घोषित करा गया, और नमाज बंद हुई,मामला कोर्ट में चलता रहा
-वर्ष 1947 में भारत सरकार ने बाबरी मस्जिद को ताला मारा, मुसलमानों को विवादित स्थल से दूर रहने के आदेश दिए, हिन्दू श्रद्धालुओं को राम लला की पूजा करने के लिए एक अलग छोटी जगह से प्रवेश मिलता था,
-दो साल बाद यानी 1949 में भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद के अंदरूनी हिस्से  में मिली,
-मूर्तियों का मुसलमानों द्वारा विरोध व्यक्त किया, 7 दिन बाद Faizabad कोर्ट ने बाबरी मस्जिद को विवादित भूमि घोषित करते हुए मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ दिया,
-लोग भगवन श्री राम की पूजा करना चाहते थे  इसीलिए 1950 में हिंदू महासभा द्वारा फैजाबाद जिला अदालत में अर्जी दाखिल कर रामलला की मूर्ति की पूजा का अधिकार देने की मांग हुई
- 10 साल बित गए मामला कोर्ट में था,उसी दौरान 1959 में  निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल पर अपना मालिकाना हक जताया,इसके विरूद्ध लड़ने के लिए ठीक दो साल बाद यानी की 1961 में सुन्नी वक्फ बोर्ड (सेंट्रल) ने Court  में मस्जिद व आसपास की जमीन पर अपना हक जताया,
-1984 में कुछ हिन्दुओं ने विश्व हिन्दू परिषद के नेतृत्व में राम जन्मस्थल को 'मुक्त' करने एवं वही जन्म स्थल पर ही राम मंदिर का पुनःनिर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया,

-अब वक्त आया जब इस अभियान का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाल लिया,

-हिन्दू लोग कोर्ट में गए और पूजा करने अनुमति मांगी,1986 में District Magistrate ने हिन्दुओं को प्रार्थना करने के लिए विवादित मस्जिद के दरवाजे पर से ताला खोलने का आदेश दिया,
-इसका विरोध व्यक्त करते हुए आगे की लड़ाई लड़ने के लिए मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन करा, दोनों पक्ष अदालती लड़ाई लड़ रहे थे,
-1987 फैजाबाद जिला अदालत से पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया,
-1989 में विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज किया और विवादित स्थल के नजदीक राम मंदिर की नींव रखी,

विवादित ढांचे बाबरी मस्जिद पर भगवा फिर ढांचा ध्वस्त 

-1990 लालकृष्ण अडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या रथयात्रा निकाली मगर बिहारमे लालूयादव ने मध्यरात्रि को ही लालकृष्ण अडवाणीजी की धरपकड़ कर ली,
-उसी दौरान राम भक्त आगे बढ़ते रहे अयोद्धया की और जबकि मुख्यमंत्री मुलायमसिंह यादव द्वारा खड़ी की गईं अनेक बाधाओं को पार कर राम भक्तो ने अयोध्या में प्रवेश किया और विवादित ढांचे के ऊपर भगवा ध्वज फहरा दिया, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया जिसमें सैकड़ों रामभक्तों ने अपने जीवन की आहुतियां दीं, सरयू तट पर  रामभक्तों की लाशें पड़ी नजर आने लगी,चारो और रक्त ही रक्त दिखाई पड़ता था,समस्त हिन्दू समाज व्यथित और गुस्से में था सरकार के आचरण से, तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वार्ता के जरिये विवाद सुलझाने की कोशिश करी  मगर वह विफल रहे,
- 6 दिसंबर 1992 को लाखो राम भक्त अयोध्या पहुंचे थे केंद्र सरकार ने इस ढांचे को सुरक्षित रखने राज्य सरकार को आदेश दिए उस समय राज्य में कल्याण सिंह की सरकार थी, मगर रामभक्तो ने विवादित ढांचा ज़मीन दोस्त कर दिया था,
-भीड़ ने उसी जगह पूजा-अर्चना की और 'राम शिला' की स्थापना कर दी, पुलिस चुप चाप खडी रही  किसी को रोकने की हिम्मत नहीं थी, मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने साफ आदेश दिया था सरकार जाए तो जाने दो मगर
कारसेवकों पर गोली नहीं चलेगी,
-मगर अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा उसका असर देश भर में दंगे में करीब दो हजार लोगों की जानें गईं

केंद्र सरकार ने जमींन पर कब्ज़ा किया और जांच के आदेश दिए 

-केंद्र की सरकार द्वारा 16  दिसम्बर 1992 को लिब्रहान आयोग गठित किया गया, जिन्हे तीन महीने में रिपोर्ट देना था, लेकिन आयोग का रिपोर्ट आते आते 17 साल लग गए, जमींन पर सरकार का कब्ज़ा था,
-1993 में केंद्र के इस अधिग्रहण को सुप्रीम कोर्ट में मोहम्मद इस्माइल फारुकी नामक व्यक्ति से चुनौती दी गयी, मगर कोर्ट ने कहा मलिकाना हक़ का फैसला हो जाएगा तो मालिकों को जमीन लौटा दी जाएगी,
-1996 में राम जन्मभूमि न्यास ने केंद्र सरकार से यह जमीन मांगी तो सरकार ने साफ़ मना करा, तब न्यास ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसे कोर्ट ने भी ख़ारिज कर दिया,
-मनमोहन सरकार को लिब्रहान आयोग को 30 जून 2009 के दिन 700 पन्नों की रिपोर्ट सौपी,
-साल 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ ने निर्णय सुनाया की विवादित भूमि को बहुमत से निर्णय दते हुए कहा की विवादित भूमि जिसे रामजन्मभूमि माना जाता रहा है उसे हिंदू गुटों को दे दिया जाए,
उतना ही नहीं न्यायालय ने कहा कि रामलला की प्रतिमा नहीं हटेंगी, न्यायालय ने कुछ हिस्सा निर्माही अखाड़े और विवादित भूमि का एक तिहाई हिस्सा मुसलमान गुटों दे दिया जाए,

मामला देश की सर्वोच्च अदालत पहुंचा 

-लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों ने निर्णय अस्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, सात साल तक मामला लटकता रहा क्यूंकि केंद्र में कांग्रेस सरकार थी, आखिर केंद्र में मोदी सरकार आयी और मामले को गति मिली,
-उच्चतम न्यायालय ने निर्णय लिया कि 11 अगस्त 2017 से तीन न्यायधीशों की पीठ इस विवाद की सुनवाई प्रतिदिन करेगी,मगर सुनवाई से ठीक पहले शिया वक्फ बोर्ड ने न्यायालय में याचिका लगाकर मामले को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश करी जिसमे मामला दो साल ज्यादा खींच गया मगर कोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया था,
500 साल बाद फैसला हुआ 
9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले फैसले को हटा दिया और कहा कि सरकार एक ट्रस्ट की रचना करे और  हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए भूमि वह ट्रस्ट को सौंप दे,और सरकार को यह  कहा की सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन दे, इस फैसले से 500 साल की लड़त का  गया समग्र राष्ट्र ने ख़ुशी जताई,और 5 ऑगस्ट 2020  को भारत प्रधानमंत्री द्वारा दोपहर 12:44 से 12 :45  भूमि पूजन किया गया,आने वाले 3 से 3.5 साल में मंदिर बनकर पूर्ण हो जाएगा,
अयोध्या का निर्माण कब हुआ राम भगवान् का जन्म तारीख क्या था एवं राम मंदिर कब तोडा वह जानने के लिए क्लिक करे https://www.maharashtrajagaran.com और पढ़े "अयोध्या-राम जन्म से बाबरी मस्जिद कब और किसने बनाई इतिहास"














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