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सचिन पायलट कांग्रेस में रहकर कभी भी नहीं बन सकते राजस्थान के मुख्यमंत्री ?

पिछले 25 साल से राजस्थान की जनता 5 साल बीजेपी और 5 साल कांग्रेस को सरकार सौंपती रही है, और दोनों पार्टियों की और एक बार बीजेपी वसुंधरा राजे सिंधियाजी और कांग्रेस की और से अशोक गेहलोत मुख्यमंत्री बनते रहे, सोचने वाली बात करे तो क्या यह दोनों के सिवा कोई दूसरा नेता नहीं है ? है दोनों पक्ष में है मगर जबतक यह दोनों है तब तक नहीं लगता की कोई दूसरा नेता मुख्यमंत्री पद हांसिल कर सके, आज हम कांग्रेस की बात करे तो उस पार्टी में तो ऐसे भी रघुकुल रीत सदा चली आयी बाप के बाद बेटे ही आये, यानी पुत्र मोह, और इसीलिए ज्यादा अच्छी तरह इसे समजते है की क्यों की सचिन पायलट कांग्रेस में रहकर कभी भी नहीं बन सकते राजस्थान के मुख्यमंत्री ,,,,
sachin pilot
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सचिन पायलट कांग्रेस में रहकर कभी भी नहीं बन सकते राजस्थान के मुख्यमंत्री ऐसा क्यों लग रहा है ?

अभी हमने सवा महीने फिल्म देखि,शुरुआत में सचिन पाइलट हीरो लगे फिर एन्ड की तरफ मुड़े तो हीरो बेइज्जत हो गए, और अशोक गेहलोत हीरो बन गए,
यहाँ यह समझना होगा की सचिन पायलट जनता के लिए हीरो थे मगर कांग्रेस के लिए विलेन, कांग्रेस के लेखक दिग्दर्शक और हीरो थे अशोक गेहलोत, जिन्होंने पूरी फिल्म शाम दाम दंड तरीका अपना कर सफलता दिलाई,
और यह होना तब से तय था जब सचिन पाइलट की पकाई खिचड़ी अशोक गेहलोत खाने बैठ गए थे, और अशोक गेहलोत तभी समज गए थे की घोड़े में दम ख़म है, तो उन्होंने शपथ विधि के दिन से ही अपने दाव खेलने शुरू करे थे,

Sachin Pilot को निकालना मुख्य वजह है अशोक गेहलोत और उनके बेटे का भविष्य,  

अशोक गेहलोत खुद के बेटे को भविष्य के मुख्यमंत्री देख पाए इसी के चलते सवा महीने तक लड़ते रहे है, साफ़ दिख रहा है, मुखिया पुत्र मोह में धूतरास्ट्र बने है,
अगर अशोक गेहलोत का बेटा राजनीती में है तो बाप अपने बेटे के लिए जगह  बनाएगा ही,सामने  किसी ज्यादा काबिलियत वाले का अस्तित्व ही नहीं रखेंगा जैसे नेशनल लेवल पर राहुल गांधी के मामले में हो रहा है,
अगर पार्टी के प्रति प्यार होता तो अशोक गेहलोत कुर्सी पर बैठते ही नहीं, 6 साल सचिन पायलट ने खूब महेनत करि तभी उनको बहुमत के करीब जाने का मौक़ा मिला वह सभी है,
राज्य में कांग्रेस की सरकार बचाने खुद भी मुख्यमंत्री पद का मोह छोड़ देते और सचिन पाइलट को कुर्सी सौंप देते,(यही बात आगे जाकर बीजेपी राजस्थान में भी आ सकती है )
अशोक गेहलोत अच्छी तरह जानते है की सचिन पाइलट राज्य में रहा तो भविष्य में उनके बेटे को घर बैठने के दिन भी आ सकते है,

अशोक गेहलोत को दोनों तरफा लड्डू ही है,चाहे हारे चाहे जीते,

क्यूंकि हारेंगे तो दुनिया को कह भी सकते है की में अकेला नरेन्द्र मोदी से अमित शाह से लड़ा किसी  ने साथ नहीं दिया करू,(यानि वीर गति को प्राप्त करना )
इसीलिए उन्होंने पहले दिन से ही ऐसी सिच्युएशन खडी कर दी की सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे, जिसके तहत उन्होंने सचिन का राज्य में से अस्तित्व ख़तम करनेका काम पहले ही शुरू कर दिया था,
उन्होंने सोचा होगा ही, सरकार ध्वस्त होनी है तो अंतीम सांस तक क्यों ना लड़े ? अगर कही भी सरकार बच जाती है तो वह राजस्थान पॉलिटिक्स के हीरो बन जाएंगे और सचिन जीरो,
और हार हुई तो भी क्या है,नेशनल लेवल पर तो राजनीती के दरवाजे खुल्ले ही है और शायद इसीलिए उन्होंने कभी सचिन पाइलट को सामने से  कॉल नहीं करा, उलटा उसे ज्यादा से ज्यादा अपमानित करते रहे,
अपमानित करने  सिलसिला समाधान के बाद भी विधानसभा में देखने को मिला जब सचिन पायलट को पीछे बैठना पड़ा,
आगे भी अशोक गेहलोत द्वारा ऐसी परिस्थिति खडी करि जाएंगी की सचिन पायलट खुद राजस्थान से नेशनल लेवल  पर चले जाएंगे,और वहा राहुल गांधी के आसपास की राजनीति .....
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कड़क-तीखी बात 

कुल मिलाकर यह है राजनीती का गन्दा गलियारा जहाँ राजस्थान राज्य की जनता फुटबॉल बनी रही पुरे सवा महीना और नेता 5 स्टार होटल में मजे लेते रहे,और उसीका नतीजा जयपुर की बाढ और बढ़ के बाद के कीचड़ को देखने से पता चल जाती है,
कांग्रेस में रहते नहीं बन पाएंगे मगर कुछ अलग करे तभी शक्यता होंगी की सचिन पायलोट CM बन पाए,,

Note- इस बात से कुछ लोगो को तीखा जरूर लग सकता है,लगे तो पानी पि लेना, मगर आर्टिकल के निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट अवश्य करे,










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