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मुंबई को बदनाम Kangna Ranaut ने करा या पुलिस और राज्यसरकार ने ?

मुंबई और महारष्ट्र में एक तरफ कोरोना संक्रमण ज्यादा फ़ैल रहा है,,दूसरी और मुंबई ड्रग्स रैकेट में रिया समेत 10 लोगो की गिरफ़्तारी हो चुकी है जांच तेज गति से चल रही है, तब महारष्ट्र की सरकार कंगना रानौत के पीछे पड़ी है और उसे कैसे परेशांन करे उसके पैतरे कर रही है, इतना ध्यान अगर कोरोना के प्रति दिया होता तो इतना संक्रमण फैला ना होता,ना ही मुंबई ड्रग्स के स्कैम में फंसा होता,और इसीलिए जनता कहती है और पूछती है मुंबई को बदनाम कंगना रानौत ने करा या पुलिस और राज्यसरकार ने ?


किसने किया मुंबई और मुंबई पुलिस का अपमान ?

कंगना ने मुंबई में ड्रग्स रैकेट में बॉलीवुड की जो बड़ी हस्तिया शामिल है न उसको पकड़वाने में NCB की मदद करने कहा,इस बात की परवाह ना करि की इसमें उसकी खुदकी जान को  खतरा है,क्यूंकि इस ड्रग्स रैकेट में बॉलीवुड और राजनीती की बड़ी हस्तियां इस काण्ड शामिल है,जो नहीं चाहेंगे की कंगना अपना मुँह खोले,वह उसे मरवा भी सकते है,

कंगना ने क्यों कहा की उसे मुंबई पुलिस पर भरोसा नहीं है ?

जो मुंबई पुलिस की आँखों के सामने इतने साल से ड्रग्स रेकैट चल रहा है,उसने एक्शन क्यों नहीं लिए इस ड्रग्स रैकेट को पकड़ने के लिए,चलो मान भी ले की उनको पता नहीं होगा (जो हजम नहीं होता ), तो जो मुंबई पुलिस को सुशांत के मृत्यु के कुछ ही दिन यानी एक हप्ता भी नहीं हुआ था तब पता चला था की इसमें कही ना कही ड्रग्स गेंग है,तो 65 दिन तक मुंबई पुलिस ने किसके कहने पर जाँच को आगे नहीं बढ़ाया ? कितने रुपये मिलते थे मुंबई पुलिस और नेताओ को ड्रग्स माफिया की और से मुंबई को उड़ता मुंबई बनाने के लिए ?
और यह ड्रग्स रैकेट कोई शिवसेना की सरकार आयी तभी शुरू नहीं हुआ, मगर कई सालो से चल रहा है और स्कॉटलैंड यार्ड के साथ तुलना होती है जिस मुंबई पुलिस की वह क्या कर रही थी इतने सालो से ?

जो मुंबई पुलिस ने दिशा सालियान और सुशांत के केस में पोस्टमॉर्टम में ही जो घोटाले होने दिए या करे उससे साफ़ पता चल रहा है की कोई बड़े लोगो को मुंबई पुलिस बचा रही है,और इस में कोई अकेले बॉलीवुड ही शामिल नहीं नेताओ के नाम भी आ रहे है, तभी तो इतने बड़े रेकैट को दबाने के लिए शुरू से सीबीआई का विरोध होता रहा साफ़ दिखाई पड़ा,

इन बातो का जवाब है कंगना के पुतले जलाने वालो के पास ?

अब सोचे मुंबई महाराष्ट्र की जनता की ऐसे में क्या गेरंटी है की मुंबई पुलिस कंगना रानौत की रक्षा करे, कल को ड्रग्स माफिया मुंबई पुलिस के सामने उसको मार डाले और पुलिस सत्ता के दबाव में कहे की कंगना ने आत्महत्या करि है तो ? 
कौनसा शिव सैनिक है जो जिम्मेदारी ले सकता है की कंगना को कुछ नहीं होगा ?
क्यों राज्य सरकार ने यह नहीं कहा पहले दिन की सरकार कंगना के प्रोटेक्शन की जिम्मेदारी लेती है ?
मुंबई पुलिस की कार्यक्षमता पर किसीको संदेह नहीं है मगर फिलहाल मुंबई पुलिस पर बड़े सवाल खड़े हुए है उसे कोई नहीं टाल सकता, अगर पुलिस ईमानदार है तो कह दे की कौन उनपर दबाव डाल रहा है,

संजय राउत और गृहमंत्री ने करी फालतू बयांन बजी  ?

कंगना रानौत ने जो कहा उसका जवाब देने की क्या जरूरत थी शिवसेना सांसद को ? तुम्हारी सरकार है तुम लोग ही रिया चक्रवर्ती का बचाव करने मैदान में उतरे थे ना ? क्या हुआ ?  कबुल किया ना की वह खुद शामिल है ड्रग्स  खरीदने बेचने और उसका उपयोग करने में, फिर क्यों बचाव में लगे थे और सीबीआई का विरोध और बिहार पुलिस का विरोध और उनके लिए बयान बाजी किसको बचाने करि ? 
संजय राउत  सांसद है लिखते भी है न्यूज़ पेपर में यानी अक्कलमंद तो है ही,फिर एक महिला के लिए आपत्ति जनक शब्द का प्रयोग क्यों ? 
और अब तीन दिन बाद कहते है की में कुछ और बोलना चाहता था मगर मुहसे निकल गया दूसरा शब्द, अब ये  नेता जनता को भी बेवकूफ समझने लगे है क्या ?
कंगना रानौत ने संजय राउत को जवाब दिए थे महारष्ट्र को नहीं,ये नेता गिरी करने के चक्कर में  फ्री पब्लिसिटी पाने के लिए मुद्दे को महारष्ट्र से जोड़ पब्लिक को भड़का नहीं रहे है नेता ?
गृहमंत्री दो दिन पहले ड्रग्स स्कैम के सवाल पर चुप्पी साध लेते है वह कंगना के लिए बयानबाजी करते है,अब कहते है की कंगना ड्रग्स लेती थी की नहीं उसकी जांच करवाएंगे,
मतलब जनता को बेवकूफ समझते है यह नेता ? जो इतने बड़े ड्रग्स स्कैम को खोलने में मदद करने तैयार है उसे ही उलटा फ़साना चाहते है ?

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कड़क और तिखी बात :

शिवसैनिक हो बीजेपी के लोग या कोई भी पार्टी के सपोर्टर,आप सभी जबतक नेता नहीं बनते तब तक आप भी  एक आम इंसान है,आपको आम इंसान की तरह सोचन चाहिए ना की नेता की बातो के बहकावे में आये,
मैंने दोनो पक्ष की बात सामने राखी है, आप पढ़े समजे फिर किसका विरोध करना है, एक तरफ ड्रग्स स्कैम में शामिल बॉलीवुड के बड़े चेहरे को उजागर कर के मुंबई को "उड़ता मुंबई" या "उड़ता बॉलीवुड" बनते बचाने वाली कंगना रानौत का या फिर ड्रग्स स्कैम पर पर्दा डालकर आरोपियों को बचाने वाले नेताओ का विरोध करना है ?
सोनिया गांधी, राहुल  गांधी का फ्रीडम ऑफ़ स्पीच कहा गया, कुछ बोलेंगे या जहां स्वार्थ हो वही बोलेंगे ?

Note - इस आर्टिकल को पढ़े और ज्यादा से ज्यादा लोगो तक अवश्य पहुंचाए,

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