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श्री मयूरेश्वर विनायक (mayureshwar vinayak ) का पूरा स्तोत्र का पाठ करे

भगवान् गणेश के अष्ट स्वरुप में से एक श्री मयूरेश्वर विनायक जी का स्तोत्र का पठन अवश्य करना चाहिए,जिसका खूब विशेष महत्व भी है,अगर आपकी श्रद्धा सच्ची है तो श्री मयूरेश्वर आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे,आईये मयुरेशवर स्तोत्र भी पढ़े,


॥ मयूरेश स्तोत्रम् ॥  ॥ ब्रह्मोवाच ॥

ॐ पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा ।
मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥१॥
परात्परं चिदानन्दं निर्विकारं हृदिस्थितम् ।
गुणातीतं गुणमयं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥२॥
सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया ।
सर्व विघ्नहरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥३॥
नानादैत्यनिहन्तारं नानारूपाणि बिभ्रतम् ।
नानायुधधरं भक्त्या मयूरेशं नमाम्यहम् ॥४॥
इन्द्रादिदेवतावृन्दैरभिष्टतमहर्निशम् ।
सदसद्वयक्तमव्यक्तं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥५॥
सर्वशक्तिमयं देवं सर्वरूपधरं विभुम् ।
सर्वविद्याप्रवक्तारं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥६॥
पार्वतीनन्दनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम् ।
भक्तानन्दकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥७॥
मुनिध्येयं मुनिनुतं मुनिकामप्रपूरकम् ।
समष्टिव्यष्टिरूपं त्वां मयूरेशं नमाम्यहम् ॥८॥
सर्वज्ञाननिहन्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम् ।
सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥९॥
अनेककोटिब्रह्माण्डनायकं जगदीश्वरम् ।
अनन्तविभवं विष्णुं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥१०॥

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shree Ashtvinayak का स्वरुप श्री मयूरेश्वर विनायक मोरेगांव


फलश्रुति
॥ मयूरेश उवाच ॥

इदं ब्रह्मकरं स्तोत्रं सर्वपापप्रनाशनम् ।
सर्वकामप्रदं नृणां सर्वोपद्रवनाशनम् ॥११॥
कारागृहगतानां च मोचनं दिनसप्तकात् ।
आधिव्याधिहरं चैव भुक्तिमुक्तिप्रदं शुभम् ॥१२॥
॥ इति मयूरेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥


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