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अष्टविनायक चौथा स्वरुप श्री बल्लालेश्वर (shree ballaleshwar vinayak ) विनायक

अष्टविनायक चौथा स्वरुप श्री बल्लालेश्वर विनायक  महाराष्ट्र के रायगढ़ के पाली गांव में बसे है,यह अष्टविनायक में एकमात्र गणपति हैं जो भक्त (बल्लाल) के नाम से प्रसिद्ध हैं। बल्लाल भगवान गणेश के एक उत्साही भक्त थे।
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मंदिर संरचना 
इस मंदिर की संरचना की विशेषता है, जब सूर्य अपनी किरणें मूर्ति के शरीर पर गिरता है। इस मंदिर के दोनों ओर दो झीलें हैं। उनमें से एक का पानी दैनिक पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। इस स्वयंभू मूर्ति की आंखें हीरे से बनी हैं, भगवान गणेश का शरीर वस्त्रों से सुशोभित है।

कहा जाता है की ....... 

 प्राचीन समय में कल्याण नामक एक व्यापारी सिंधु घाटी में कोंकण पालिर (पाली गांव) नामक एक गाँव में रहता था। उनकी पत्नी का नाम इंदुमती था। कुछ दिनों बाद उन्हें एक बेटा हुआ। उसका नाम बल्लाल है। जैसे-जैसे बल्लाल बड़ा होता गया, गणेश की मूर्ति पूजा के प्रति उसका झुकाव और अधिक स्पष्ट होता गया। धीरे-धीरे वह गणेश का ध्यान करने लगा। उनके दोस्त भी गणेश भक्ति के लिए पागल हो गए। 
बल्लाल अपने दोस्तों के साथ जंगल में गया और गणेश की मूर्ति की पूजा करने लगा। गांव में चीख-पुकार मच गई कि बल्लाला की कंपनी से बच्चे परेशान थे। 
लोग कल्याण शेठजी के पास जाने लगे और शिकायत करने लगे कि 'बल्लाल ने हमारे बच्चों को बिगाड़ दिया है।' गुस्से में फिट होकर, वह एक बड़ी छड़ी लेकर जंगल में गया जहाँ बल्लाल था। वहां बल्लाल अपने साथियों के साथ गणेश की मूर्ति की पूजा कर रहे थे। 
बल्लाल गणेश के ध्यान में तल्लीन थे। जिसे देखकर कल्याण शेठजी के पैरों की आग उसके सिर पर जा लगी। 
दूसरे बच्चे डर के मारे भाग गए, लेकिन बल्लाल गणेश ध्यान में मग्न रहे  कल्याण शेठजी ने बल्ला को छड़ी से पीटा,मगर यहतो  बल्लाल गणेश भक्त थे,चीख पुकार नहीं करि और भक्ति में लीन रहे,मगर ज्यादा मार पड़ने से वह बेहोश हो गया, 
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लेकिन कल्याण सेठ का गुस्सा  नहीं उतरा उसने उसी हालत में एक पेड़ से बल्लाल को बांध दिया, कल्याण शेठ ने गुस्से में कहा तुम्हारे गणपति को अब तुम्हें बचाने के लिए आने दो, अगर आप घर आते हैं, तो मैं आपको मार डालूंगा, मेरे साथ आपका रिश्ता हमेशा के लिए टूट गया। ’इसलिए कल्याण शेठ ने छोड़ दिया।
थोड़ी देर बाद जब  बल्लाल को होश आया उसका शरीर अकड़ रहा था, उसी स्थिति में वह भगवन गणेश के पास गया, हे भगवान आप एक विध्वंसक हैं, आप अपने भक्त की कभी उपेक्षा नहीं करते ... वह जो गणेश की मूर्ति फेंकता है और मुझे मारता है वह अंधा, बहरा, गूंगा और कुष्ठ होगा, मैं अब  आपका ध्यान करते हुए मर जाऊंगा। '
बल्लाला की दौड़ सुनकर विनायक-गणेश एक ब्राह्मण के रूप में प्रकट हुए, फिर भगवान गणेश की दुआ से बल्लाल का शरीर जितना सुंदर था उतना ही सुंदर हो गया। 
भगवन गणेश ने बल्लाला से कहा "जिसने तुम्हें परेशान किया है उसे न केवल इस जीवन में बल्कि अगले जन्म में भी बहुत कष्ट उठाने पड़ेंगे," मैं आपकी भक्ति से प्रसन्न हूं, आप मेरी भक्ति, महान शिक्षक और लंबे जीवन के प्रवर्तक होंगे, अब पूछें कि आप क्या चाहते हैं। ”
तब बल्लाल ने कहा - “आप इस स्थान पर सदैव रहें और अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करें। इस भूमि को गणेशक्षेत्र के रूप में जाना जाना चाहिए। ”
तब गणेशजी ने कहा - "तुम्हारी इच्छा के अनुसार, मैं यहां हमेशा 'बल्लाल विनायक' नाम से रहूंगा। 

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इस स्थान से यह मान्यता भी जुड़ी है 

त्रेता युग में जिस दण्डकारण्य का जिक्र है यह स्थान उसी का हिस्सा था, यह भी कि भगवान श्री राम को आदिशक्ति मां जगदंबा ने यहीं पर दर्शन दिये थे, यहां से कुछ ही दूरी पर वह स्थान भी बताया जाता है जहां सीताहरण के समय रावण और जटायु में युद्ध हुआ था।

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