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श्री विघ्नेश्वर ओझर(Shree Vigheneshwar Ozar) दर्शन

अष्टविनायक का आठवां स्वरुप श्री विघ्नेश्वर ओझर के दर्शन भी विशेष महत्व है, ओझर के विघ्नेश्वर को श्री गणपति को विघ्नहर के रूप में भी जाना जाता है, भाद्रपद गणेश जयंती को यहां चार दिनों तक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है, देश विदेश से श्रद्धालु उमड़ते है, उतनाही नहीं संकष्टी चतुर्थी पर भी यहाँ गणेशजी के भक्त ज्यादा आते हैं, महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर तालुका के ओझर गांव में बेस है श्री विघ्नेश्वर विनायक, विघ्न का अर्थ है काम में बाधा और हर का अर्थ है पदच्युत, ओझर में श्री विघ्नहर अष्टविनायक में सबसे अमीर गणपति हैं, ओझर कुकड़ी नदी पर बसा एक गाँव है,

shree vighneshwar vinayak
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पौराणिक कथा अनुसार कहे तो 

एक बार अभिनंदन नाम के एक राजा ने इंद्रपात्र को पाने के लिए यज्ञ किया था, इंद्र को इस बात की जानकारी मिलते ही वह खूब क्रोधित हो गए, उन्होंने तय किया की कैसेभी करके यज्ञ को अटकना होंगा, इंद्रा ने विघ्नसुरा नमक राक्षश को यज्ञ रोकने के लिए कहा, विघ्नसुरा ने बलिदान में बाधा डाली, और तो और पुरे ब्रह्मांड में हल्ला मचा दिया,चारो और अफरातफरी मच गयी, ऋषि मुनियोंने एवं राजा अभिनन्दन ने  ब्रह्मा और शंकर से प्रार्थना करी रक्षा के लिये, 

ब्रह्मा और शिवजी ने गणपति जी से मदद मांगी, गणपति ने पराशर ऋषि के पुत्र के रूप में अवतार लिया और विघ्नसुरा के साथ भीषण युद्ध किया, जिसमे विघ्नसुर की हार हुई उसने गणपति के सामने आत्मसमर्पण कर दिया माफ़ करने कहा, गणपति ने उन्हें उस स्थान पर नहीं आने की शर्त पर रिहा किया, 

विघ्नसुरा ने गणपति से अनुरोध किया कि आपके भक्त आपका नाम ले तो पहले मेरा नाम भी ले  आशीर्वाद दे और उसने गणपति से कहा की आपको यहां रहना चाहिए, गणपति ने विघ्नसुरा का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और वे विघ्नहर के नाम से इसी स्थान पर रहने लगे,विघ्नसुर के सभी राक्षसों ने एक रात में ओझर गणपति का मंदिर बनाया था,लोग बहुत खुश हुए और उन्होंने यहां विघ्नेश्वर की स्थापना की।

shree vighneshwar temple
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मंदिर निर्माण और विशेषता 

1785 में बाजीराव पेशवा के भाई चिमाजी अप्पा ने इस मंदिर का निर्माण किया और इस पर एक स्वर्ण मुकुट रखा, इसके अलावा, मंदिर के प्रवेश द्वार पर चार द्वारपाल हैं, पहले और चौथे द्वारपाल के हाथों में एक शिवलिंग है, गणपति का अपनी मां और पिता के प्रति बहुत सम्मान है, इस द्वारपाल के हाथों में शिवलिंग यह दर्शाता है कि भगवान गणेश के भक्तों को भी अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए, 

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मंदिर की दीवारों में सुंदर चित्रकारी और मूर्तियां हैं जो आंख को भाती हैं, मंदिर पूर्व की ओर है और एक मजबूत पत्थर की दीवार से घिरा हुआ है। मंदिर की चोटियाँ और शिखर स्वर्णिम हैं, रिद्धि और सिद्धि की मूर्तियाँ गणपति के चारों ओर हैं, शेषनाग और वास्तुपुरुष भगवान गणेश की मूर्ति पर हैं मंदिर में छोटे-छोटे कमरे हैं, इन्हें अंडाशय कहा जाता है, भक्त यहां बैठकर ध्यान कर सकते हैं। आप भी जाइये और श्री विघ्नेश्वर विनायक के दर्शन करे और अपनी मनोकामना पूर्ण करे 

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