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CM उद्धव ठाकरे vs राजयपाल कोशियारी कौन जीता कौन हारा ?

कल  महाराष्ट्र में मंदिर खोलने के लिए आज बीजेपी और भगवन के भक्तो को रास्तो पर उतरना पड़ा,महाराष्ट्र में अलग अलग मंदिर में प्रदर्शन करा गया, देश के ज्यादातर राज्य में मंदिर के द्वार खोल दिए गए है,मगर महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते सरकार ने मंदिर खोलने की अनुमति नहीं दी,


rajypal koshiyar vs udhav thakre
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लोगो का गुस्सा यह है की महाराष्ट्र में बार एंड रेस्टोरेंट खोल दिए गए है,मुख्यमंत्री के लिए मंदिर के द्वार खोले जाते है तो जनता के लिए क्यों बंद, मंदिर के आसपास भी लोगो का धंधा रोजगार ठप्प है वह बात का ध्यान सरकार क्यों नहीं रखती ? 

महाराष्ट्र  राज्य में मंदिरों के द्वार  खोलने के मुद्दे को रेखांकित करते हुए, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा। पत्र में, उन्होंने हिंदुत्व में शिवसेना की भूमिका पर सीधे सवाल उठाए क्या हिंदुत्व छोड़ दिया है ?

जिस पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि मेरे हिंदुत्व को आपके प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है,

राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र और मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए उत्तर को देखते हुए फिर एक बार शिवसेना एवं राज्यपाल के बिच संघर्ष बढ़ रहा है, 

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि,

(पूरा पत्र नहीं लिखा हमने   उसकी लिंक जोड़ी है , ( पत्र पढ़े ) .....(आगे लिखा )....  सर, आपने इस पत्र मेंमेरे लिए  हिंदुत्व के बारे में जो उल्लेख किया है वह सही है ?  लेकिन मेरे  हिंदुत्व को आपके प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, मुझे इसे किसी से सीखने की जरूरत नहीं है। मेरे राज्य की राजधानी को POK  कहने वालो का स्वागत मेरे हिंदुत्व में फिट नहीं बैठता।

mandir kholo andolan 
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यहाँ मुख्यमंत्री को देखना चाहिए की जब POK सी मुंबई की तुलना करने जब म्युनिसिपालिटी के लोग गए थे तब कितना सोश्यल डिस्टेंस सम्हाला गया था ? तब कोरोना ख़तम हो गया था क्या ? 

मुख्यमंत्री और भी लिखते है की क्या आपने अचानक "सेक्युलर 'अपने आप को बदल दिया है, जिस शब्द से आपको नफरत है? आपके पास ऐसा सवाल क्यों है? क्या आप कह रहे हैं कि धर्म स्थल को खोलना हिंदुत्व है और इसे नहीं खोलना सेक्युलर नहीं है? इसलिए धर्मनिरपेक्षता उस कार्यक्रम का मूल है जिसमें आपने पद की शपथ ली - क्या आप सहमत नहीं हैं? क्या इस संकट से लड़ने के दौरान मेरे पास कोई दैवीय सन्देश है?आपका यह सवाल है, आपने ऐसी चीजों का अनुभव किया होगा, लेकिन मैं इतना महान नहीं हूं।मैं यह देखने के लिए ईमानदार प्रयास कर रहा हूं कि देश में जो हो रहा है उसे देखकर महाराष्ट्र में कितना अच्छा हो सकता है।

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मुख़्यमंत्री जी के लिखने की स्टाइल देख कर लगता है की वह प्रतिष्ठा का सवाल खड़ा कर रहे है बे वजह, आज भी शिरडी में लोग धरने है, राज्य सरकार को गुजरात और दूसरे राज्यों में जो नीतिनियम बनाकर मंदिर खोलने की अनुमति दी है ऐसे ही महाराष्ट्र में भी परमिशन देनी चाहिए, या फिर मदिरा स्थल भी बंद कर देने चाहिए, क्यूंकि बार रेस्टोरेंट लोगो के रोजगार  है तो मंदिर के इर्दगिर्द उससे भी ज्यादा रोजगार खड़ा है,

महाराष्ट्र की जनता यह भी कहने लगी है की उद्धव ठाकरे को यह नहीं भूलना चाहिए की यही राज्यपाल की महेरबानी से आपकी मुख्यमंत्री की कुर्सी बची है,नहीं तो यही कोरोना का बहाना रखकर विधान परिषद्  चुनाव नहीं करते तो आपको कुर्सी छोड़ना पड़ता, घमंड ना रखते हुए सामने की व्यक्ति की उम्र भी देखनी चाहिए और जवाब देना चाहिए,

संवादाता  - राजू पटेल 


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