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मुंबई मेट्रो कारशेड उद्दव सरकार के फैसले की देवेंद्र फडणवीस ने करी कड़ी आलोचना

सरकार बदलते ही पुरानी सरकार के फैसले को पलटने की परंपरा महाविकास आघाडी सरकार ने भी कायम रख्खी,सवाल यह है की पुरानी सरकार में उद्धव ठाकरे जी की पार्टी भी शामिल थी, अगर उस वक्त निर्णय गलत था तो वह मौन क्यों धारण कर बैठे थे ?

devendra fadanvis vs udhav thakre
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पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष  नेता  देवेंद्र फडणवीस ने कहा 

महाविकास आघाडी सरकार का आरे(RA) से कांजुरमार्ग तक मेट्रो कार शेड को स्थानांतरित करने का दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय सिर्फ अहंकार से बाहर है! इसी सरकार द्वारा गठित एक समिति ने कहा कि कांजुरमार्ग तक मेट्रो कार शेड ले जाने पर अतिरिक्त 4,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे,  यह राज्य सरकार अपने अहंकार के लिए किसे मारना चाहती है ? और क्यों?

मामला क्या है ?

कांजुरमार्ग स्थल को पहले सरकार द्वारा माना जाता था। लेकिन उस जगह माननीय हाईकोर्ट का स्टे था क्यूंकि कुछ व्यक्तियों ने जगह का मालिकाना हक्क जताया था, स्टे को वापस लेने का अनुरोध किया गया था,  

माननीय कोर्ट ने कहा 

अदालत ने कहा यदि दावों का निपटारा किया गया था तो उस जगह का राशि का भुगतान किया जाना चाहिए, यह राशि 2015 में लगभग 2400 करोड़ रुपये थी आज स्थिति क्या है? माननीय  यह भी कहा फिर से अगर आप सुप्रीम कोर्ट जाते हैं, तो देरी के लिए कौन जिम्मेदार है?

इसके अलावा बात करे तो जैसा कि कांजुरमार्ग की साइट 'मार्श लैंड' है, इसे स्थिर करने में कम से कम 2 साल लगेंगे उसकी भरपाई या जिम्मेदारी कुन लेगा ? 

अब तक की सभी निविदाओं को रद्द करना होगा और पूरी प्रक्रिया को नवीनीकृत करना होगा, इस नए स्थान के लिए कोई DPR या व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार नहीं की गई है,

metro car shed
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करोडो रुपियो का पानी अलग से 

इतने समय से मुम्बईकर ने ट्रैफिक समस्या का सामना करा,मुम्बईकर को इंतजार था की मेट्रो परियोजना अगले साल मुंबईकरों की सेवा में आ जाएंगी, मगर नेताओ की नेतागिरी की वजह से अब अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गई है,यानी मुम्बईकर का सपना पूरा कब होगा पता नहीं, 

पैसो की बात करे तो 400 करोड़ पहले ही आर ऐ (R A) की कार शेड के लिए खर्च किए जा चुके थे, अब निलंबन के कारण 1300 करोड़ पानी में चले गए और  इसके आलावा 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ, ये किसके करोडो  रुपये है ? क्या नेताओ की जेब से जाते है?

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कड़क और तीखी बात 

नेता सड़क पर निकलता है रास्ता साफ़  हो जाता है, जनता टेक्स के पैसे भी चुकाती है और ट्रैफिक समस्या का सामना भी करती है, क्या यह नेता और मुख्यमंत्री सोचते नहीं की अगर कांजुरमार्ग भूमि विवाद जारी रहता है तो 2400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा वह किसकी जेब से जाएगा ? क्या मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जी जिनकी शिवसेना पिछली सरकार में शामिल थी तब उद्दवजी को मालुम नहीं था की देवेंद्र फडणवीस जी का निर्णय गलत था ? उस वक्त वह चुप क्यों रहे ?

जनता भी पूछती है की वास्तव में सरकार अपने अहंकार के लिए मुंबईकरों की यात्रा को रोककर क्या हासिल करना चाहती है? सत्ता में साथी बदलेंगे तो सरकारी योजना भी बदल जाएंगी ?

संवादाता -राजू पटेल 



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