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छोटी दिवाली का महत्व, मुहूर्त का समय और विधि एवं इतिहास

भारत में सनातन हिन्दू धर्म में दिवाली सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है, छोटे बड़े सभी दिवाली का इन्तजार करते रहते है, उत्तर भारत में दिवाली से ठीक एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाने की परंपरा है. इस दिन नरका चतुर्दशी के रूप में भी जाना जाता है.


दीवाली  

दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक रहता है.दिवाली धनतेरस के उत्सव के ही साथ ही शुरू हो जाता है, इसके बाद नरका चतुर्दशी एवं छोटी दिवाली, फिर दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई बहन का ख़ास त्यौहार भाई दूज. 

इन दिनों लोग अपने घर एवं ऑफिस को लाइट, दीयों और मोमबत्तियों से सजाते हैं.मिठाईया बनाते है और बांटते है,फटाके फोड़ते है और खुशिया बाटते है, इस  साल चतुर्दशी और अमावस्या दोनों दिन एक ही दिन पड़ रहे हैं.

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छोटी दीवाली- समय और दिन

14 नवंबर 2020 शनिवार को नरक चतुर्दशी या चोती दिवाली एवं दीवाली का त्योहार मनाया जाएगा. चतुर्दशी तिथि 13 नवंबर को शाम 5:59 बजे से शुरू होगी और 14 नवंबर को दोपहर 2:17 बजे समाप्त होगी. 

अभ्यंग स्नान मुहूर्त 14 नवंबर को सुबह 5:23 से सुबह 6:43 तक रहेगा. गुजरात में उसे काली चौदस के रूप में मनाया जाता है, लोग कलह को चौराहे पर रखकर आते है,मान्यता है की घर में से कलह निकल जाता है,

पौराणिक कथा 

लोगो का कहना है की नरकासुर की मां भूदेवी ने घोषणा करी थी उसके बेटे की मौत के दिन की सभी लोग शोक की बजाय जश्न मनाये. 

अन्य पौराणिक कथा में कहा गया है कि देवताओं को डर था कि राजा बलि बहुत शक्तिशाली हो रहे हैं, इसलिए भगवान विष्णु खुद एक ऋषि के रूप में उनके सामने गए और उन्हें अपने राज्य पर तीन फुट की जगह देने के लिए कहते हैं. विष्णु ने धरती और स्वर्ग लोक को दो कदमों से माप दिया और तीसरे कदम में राजा बलि के सिर को मांगा और इस तरह से देवताओं ने राजा बलि के शासन का अंत कर दिया. इसतरह बुराई के ऊपर अच्छाई की जीत के साथ ही यह पर्व मनाया जाता है.

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