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दिवाली के दिन घर एवं कारोबार स्थल पर सफाई एवं लक्ष्मी पूजा क्यों करते है ?

यह उत्सव 14 साल वनवास के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने का प्रतीक है. भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के स्वागत के लिए पूरा अयोध्या शहर सजाया गया था. लोगों ने अपने राजा का स्वागत करने के लिए शहर को मिट्टी के दीयों से सजाया. तब से दिवाली के दिन मिट्टी के दीयों से सजावट की जाती है और इस त्योहार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.

diwali

लक्ष्मी पूजन की मान्यता

मना जाता है की दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुईं थी. यही कारण है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन होता है. इस दिन मां लक्ष्मी से घर में अन्न-धन का भण्डार भरे रखने की प्राथना करी जाती है और उनके साथ भगवान गणेश की पूजा भी होती है.

व्यापारी लोग उस दिन पुरे साल का जमा उधार कर के हिसाबी नोटबुक की पूजा खुद  करते है या पंडित जी द्वारा पूजा करवाते है, एवं दूसरे साल व्यापार में वृद्धि हो उसके लिए मनोकामना करि जाती है,

दिवाली आते ही घर की साफ़ सफाई क्यों ?

मान्यता अनुसार, जहां स्वच्छता होती है  वहीं पर ईश्वर का वास माना जाता है. इसीलिए दिवाली पर साफ-सफाई का ख़ास महत्व है, कहा जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और लोगों के घरों में जाती हैं. इस भव्य उत्सव की तैयारी घर,दुकान,ऑफिस में साफ़-सफाई से शुरू होती है और उसे सजाया जाता है.(हमारा मानना है की साफ़ सफाई हमेशा करते रहना चाहिए जिससे लक्ष्मी देवी की कृपा आप के परिवार पर बानी रहे )

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दिवाली के दिन घर की महिलाये घर  के द्वार एवं आँगन को रंगोली से सजती है, मिठाई, पकवान आदि तैयार करती है,जिसे एक-दूसरे में बांटे भी जाते हैं.सभी लोग एक दूसरे को आने वाले साल के लिए शुभकामनाये देते है.और रात के समय खूब फटाके फोड़ते है, और खुशिया मानते है, 

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