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किसान आंदोलन एक राजनितिक शाजिश क्यों लगती है ?

जितने किसान नेता उतनी अलग अलग मांग है क्या ? जो एक नहीं होना चाहते ? देश किसान के साथ होता है ,मगर किसान जब राजनितिक हथियार बनता है तो वह देश की सिम्पथी गवां देता है, और आज यही हो रहा है, एक किसान संगठन निरंकारी ग्राउंड में बैठने तैयार हुआ, तब दूसरे कहते है हम नहीं जाएंगे ,हमें जंतर मंतर पर जाना है, और एक कहता है हम दिल्ही के पांचो रास्ते ब्लॉक करेंगे, क्या सरकार करोडो किसानो का सोचना है की इन चंद लोगो की बात पर ध्यान देना है ? 


(महाराष्ट्र जागरण तस्वीर की सत्यता पृष्टि नहीं करता ,सरकार को जांच करवानी चाहिए ,क्यूंकि यह तस्वीर सोश्यल मिडिया पर वाइरल है )

जनता कहती है यह कैसा किसान ? 

जब सरकार ने बात करने की तैयारी दिखाई है तब अपनी मनमानी पर उतरे है, देश में सिर्फ पंजाब और उत्तरप्रदेश के कुछ इलाको में ही किसान है क्या ? जिन्हे सरकार की निति नहीं पसंद आयी है, बाकी कोई किसान नहीं क्या देश में ? 

जनता का सरकार से निवेदन है की पहले तो उजागर करे किसान नेताओ की असलियत, अभी जो तस्वीर में दिखाई पड़ रहा है उसकी सत्यता  की जांच करे की वह तस्वीर कब की है, 


यह जितने भी किसान संगठन रास्तो उतरे है उसमे सभी नेता लेफ्टिस्ट, कांग्रेस,AAP, समाजवादी पार्टी,अकाली दल से जुड़े हुए है , यह कोई गरीब किसान नेता नहीं है,ना तो कभी उन्होंने किसी गरीब किसान के बारे में सोचा है, 

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यह लोग चाहते है की अफरातफरी हो और पुलिस किसानो पर गोलीबार करे, जिससे विपक्ष को मुद्दा मिले और नरेन्द्र मोदी सरकार को बदनाम करा जाए, अगर वाकही में जैसे कहा जा रहा है की किसान लूट जाएंगे बर्बाद हो जाएंगे ऐसा होता तो देश भर के किसान सड़क पर होते ना की दो राज्यों से गिने चुने किसान आते,

कांग्रेस और AAP  दोनों की तस्वीरें  काफी कुछ कहती है, जो दिल्ही सरकार मास्क ना पहनने पर rs,2000 की दंडात्मक कार्यवाही कराती है वह किसानो को इकठ्ठे होने जगह देती है एवं उनके एक भी नेता ने किसानो को अपील तक नहीं करि की मास्क लगाए,सोश्यल डिस्टेंस रखे दो व्यक्ति के बिच में, ना किसी कोंग्रेसी ने किसानो को अपील करि है, 


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