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महाराष्ट्र भंडारा के जिला अस्पताल में मध्यरात्रि को लगी आग में 10 नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत-जिम्मेदार कौन ?

महाराष्ट्र में नागपुर के भंडारा के सरकारी अस्पताल में शनिवार देर रात आग लगने से 10 नवजात शिशुओं की जलाकर और दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई। जिला अस्पताल के बच्चों के नवजात केयर यूनिट में देर रात 2 बजे अचानक से आग लग गई और यह दिल दहलाने वाला हादसा हुआ।

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बच्चो की मौत के लिए दोषी कौन ?

इंटेंसिव केयर यूनिट में बच्चो के परिवार वालो को नहीं रहने दिया जाता सिर्फ हॉस्पिटल का स्टाफ होता है, सवाल यह है की क्या जब आग लगी या कहे आग लगने की शुरुआत हुई तब वहां कौन था ? नर्स, वॉर्डबॉय या सिक्युरिटी कौन था ? ऐसे स्पेश्यल यूनिट में कमसे कम दो नर्स की ड्यूटी तो होनी ही चाहिए जब बच्चे अकेले हो यह हर कोई मानता होगा,

मगर जो सिक्युरिटी ने 7 बच्चो को बचाया उसकी बात सुनेंगे तो साफ़ पता चलता है की वहा घटना के समय कोई नहीं होगा, सो गए होंगे ,जबकि नाइट ड्यूटी में जागना होता है ख़ास कर सिर्फ दो तीन महीने के छोटे बच्चे अकेले होते है, सरकार स्टाफ को नींद निकालने के पैसे नहीं देते, क्यूंकि ड्यटी पर दो तीन लोग जागते होते तो आज 10 बच्चो को अपनी जान गावनि नहीं पड़ती,आग लगती है तो दो पांच मिनट में ही विकराल स्वरुप नहीं ले लेता,यह सभी मुद्दे पर नजर डालेंगे तो साफ़ पता चलता है की स्टाफ नींद खिंच रहे होंगे, 

सरकार में बैठे नेता भी इसमें इसीलिए दोषी होते है ?

सबको नरेन्द्र मोदी बनना है मगर नरेन्द्र मोदी ने CM  रहते जो महेनत करि थी आधी रात को और कभी भी किसीको बताये बिना सरकारी दफ्तरों और अस्पतालों में चले जाते थे,जिसकी वजह से सरकारी बाबुओ में भी डर रहता था की मुक्यमंत्री कभी भी राउंड पर आ सकते है,नतीजा यह था की आज भी गुजरात में सरकारी स्टाफ नौकरी के समय पर अपनी जगह पर कार्य करता हुआ नजर आता है, 

क्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री या आरोग्य मंत्री ऐसे बिन बताये अचानक कभी किसी दौरे पर गए है ? हमने तो नहीं सूना अभी तक, यह चीज योगी आदित्यनाथ अवश्य करते है,

भंडारा जिला अस्पताल के मेडिकल अधिकारी डॉ.प्रमोद खंडाते ने बताया, 'देर रात करीब 2 बजे के आसपास यह हादसा हुआ है, अस्पताल के आउट बोर्न यूनिट में धुआं निकल रहा था, जब अस्पताल की नर्स ने दरवाजा खोला तो देखा आउट बॉर्न यूनिट में सब जगह धुआं ही धुआं था।' यहाँ सवाल यह है की नर्स वॉर्ड के अंदर क्यों नहीं थी ?

7 बच्चो की जान बची वह भी दमकल आने के बाद सिक्युरिटी जवान ने बचाई तो वह आग लगने से लेकर दमकल आने तक स्टाफ ने क्या करा ?

अब क्या होगा ?

अब 5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा, जांच के आदेश दिए जाएंगे ,पता नहीं जांच के रिपोर्ट कब आयेंगा ? अब सरकारों  के इस जांच शब्द से जनता भी ऊब चुकी है, हमारे देश में घटना होने के बाद जांच के आदेश देकर लोगोको घटना भुला दी जाती है, मगर कभी घटना ना हो उसके लिए कदम उठाये जाते है ??

जनता जागृत हो सरकारों के भरोसे ना बैठे,जहा सरकारी बाबू काम नहीं करते जनता को उनके कान पकड़ने होंगे,

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