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पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री- कल्पना नहीं कर सकते ऐसा नेता भारत मे हुआ होगा-वह बाते जो आज के युवा को जाननी चाहिए

भारत के यह लाल लालबाहदुर शास्त्री जी को लोग यह बात के लिए याद करते है की पकिस्तान के साथ दो घंटे युद्ध और चलता तो भारत की सेना ने लाहौर तक कब्जा कर लिया होता, जिस रफ्तार से भारत की सेना आगे बढ़ रही हमारा तो पूरा अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा !

पाकिस्तान को लगा की बुरा हाल होगा तभी पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा कि वो किसी तरह से युद्ध रुकवा दे,अमेरिका जानता था कि शास्त्री जी इतनी जल्दी नहीं मानने वाले है,

अमेरिका से गेहूं आयत होता था भारत के लिए बिलकुल लाल रंग का सड़ा हुआ गेंहू,जो जानवर भी ना खाये, समझोता पंडित नेहरू ने किया था,

अमेरिका ने भारत को धमकी दी कि हम भारत को गेहूं देना बंद कर देंगे ! तब शास्त्री जी ने कहा, कर दो ! कहा की हमे भूखे मारना पसंद होगा बेशर्ते तुम्हारे देश का सड़ा हुआ गेंहू खाके  मरे, एक तो हम पैसे भी पूरे दे ऊपर से सड़ा हुआ गेहूं खाये ?

शास्त्री ने तत्काल दिल्ली के रामलीला मैदान से लाखो लोगो से निवेदन किया कि पाकिस्तान से युद्ध चल रहा है ! ऐसे मे देश को पैसे कि बहुत जरूरत पड़ती है, सब लोग अपने फालतू खर्चे बंद करे, ताकि वो देश के काम आए, या आप सीधे सेना के लिए दान दे, और हर व्यति सप्ताह से एक दिन सोमवार का वर्त जरूर रखे !!

प्रधानमंत्री शास्त्री जी के आह्वान पर देश के लाखो लोगो ने सोमवार को व्रत रखना शुरू कर दिया,नतीजा हमारे देश मे ही गेहु बढ्ने लगा, शास्त्री जी भी खुद सोमवार का व्रत रखा रखते थे !

शुरुआत शास्त्री जी ने करि 

उनके घर मे काम करने बाई आती थी, जो साफ सफाई और कपड़े धोती थी, तो शास्त्री जी उसको हटा दिया और  कहा की  देश हित के लिए मैं इतना खर्चा नहीं कर सकता, मैं खुद ही घर कि सारी सफाई करूंगा, क्यूंकि पत्नी ललिता देवी बीमार रहा करती थी, शास्त्री जी ने अपने कपड़े धोना खुद शुरू करा,

घर मे ट्यूटर आया करता था बच्चो को अँग्रेजी पढ़ाने के लिए उसे भी बंद करा 

एक दिन शास्त्री जी पत्नी ने कहा कि आपकी धोती फट गई है आप नई धोती ले आईये, तब शास्त्री जी ने कहा कि सूई धागा लेकर इसको सिल दो मैं नई धोती लाने की कल्पना भी नहीं कर सकता, मैंने सब कुछ छोड़ दिया है पगार लेना भी बंद कर दिया है इसीलिए कम खर्चे मे घर का खर्च चलाओ,

शास्त्री जी युद्ध के बाद समझोता करने ताशकंद गए और फिर जिंदा कभी वापिस नहीं लौट पाये, पूरे देश को बताया गया की उनकी मृत्यु हो गई,आज भी यह बात स्वीकारने के लिए तैयार नहीं की मृत्यु आकस्मिक थी ? 

यह ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने 1965 में अपनी फीएट कार खरीदने के लिए पंजाब नेशनल बैंक से पांच हजार ऋण लिया था। स्कूल के वक्त में शास्त्री के बच्चे तांगे से स्कूल जाते थे और प्रधानमंत्री बनने के बाद कार खरीदने की इच्छा जताई तो उस वक्त 12 हजार रुपए में कार आई.मगर शास्त्रीजी के पास केवल सात हजार रुपए थे तो उन्होंने बैंक से पांच हजार ऋण लेकर कार खरीदी थी.मगर ऋण की एक किश्त भी नहीं चुका पाए। 

1966 में देहांत हो जाने पर बैंक ने नोटिस भेजा तो उनकी पत्नी ने अपनी पेंशन के पैसे से कार के बकाया लोन धीरे धीरे कर के चुकाया, शास्त्री की यह कार आज भी जनपथ स्थित संग्रहालय में आज भी मौजूद है। 

शास्त्री जी की एक बात अजीब है जब उनके बेटे ने अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया तो उसे प्रधानमंत्री आवास पर पहुंचा दिया गया. इस पर शास्त्री ने आरटीओ को बुलाया और फटकारते हुए कहा कि बिना ड्राइविंग टेस्ट और सत्यापन के किस आधार पर लाइंसेंस बना दिया गया ?

ऐसा प्रधानमंत्री भारत को शायद ही कभी मिले ! अंत मे बैंक अकाउंट मे सिर्फ 365 रुपए 35 पैसे थे 
भारत मे शास्त्री जी जैसा सिर्फ एक मात्र प्रधानमंत्री हुआ ! जिसने अपना पूरा जीवन आम आदमी की तरह व्तीत किया, और पूरी ईमानदारी से देश के लिए अपना फर्ज अदा किया ,

शायद आज कल्पना भी नहीं कर सकते ऐसा नेता भारत मे हुआ होगा,आज भी देश के लोगो को ऐसे नेता की तलाश है, अपना आदर्श बनाना है तो ऐसे नेता को बनाये ,ना की किसी गुंडे मावली नेता को। 

NOTE :
ऐसा नेता आपको आज की राजनीती में कौन लगता है वह टिप्पणी बोक्ष में अवश्य लिखे,महाराष्ट्र जागरण को सब्स्क्राइब अवश्य करे,धन्यवाद 

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