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मुर्दाघर से श्मशान तक दलालों का नेटवर्क, दाह संस्कार के लिए भी वसूली :राजस्थान में मजिस्ट्रेट तक को नहीं बख्शा

कोरोना संक्रमण से राजस्थान का हाल बेहाल है। इसकी आड़ में कई तरह के गोरखधंधे धड़ल्ले से चल रहे। हालत इतनी खराब है कि संक्रमितों की मौत के बाद उनके दाह संस्कार के लिए भी वसूली हो रही है। ये रुपया दलालों के हाथ में जा रहा है। 

मुर्दाघर से श्मशान तक दलालों का नेटवर्क साभार : https://timesofindia.indiatimes.com

आम आदमी की तो बात ही छोड़ दीजिए, उदयपुर में जाँच करने गए न्यायिक अधिकारी तक को दलालों ने नहीं बख्शा। न्यायिक अधिकारी ने 13 श्मशान घाटों पर छापेमारी की। हिरणमगरी सेक्टर-3 व गवर्द्धनविलास सेक्टर-13 स्थित मोक्षधाम श्मशानों में दलालों ने क्रमशः 15,000 और 2100 रुपए माँगे।

ये राशि तो सिर्फ कोरोना संक्रमित के शव को उठाने भर के लिए ही थी। चिता पर लड़की जमाने से लेकर शव को जलाने तक के कई अन्य खर्चों का हिसाब अलग से माँगा गया। मीडिया में खबरें आने के बाद अशोक नगर श्मशान घाट पर अधिकारियों ने 5 कर्मचारियों की नियुक्ति की और किसी व्यक्ति द्वारा रुपए माँगने पर प्रशासन को सूचना देने सम्बन्धी बोर्ड लगाए। उप महापौर ने इसकी निगरानी के लिए इंस्पेक्टर के नेतृत्व में एक टीम का गठन भी किया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष RP सोनी ने ADJ व प्राधिकरण के सचिव कुलदीप सूत्रधार को 13 श्मशान घाटों के निरीक्षण के लिए भेजा। इसी दौरान एक सेंटर पर उन्हें 15,000 तो एक पर 2500 रुपए माँगे गए। उन्होंने तत्क्षण इसकी रिपोर्ट बना कर निगम आयुक्त और SP को सौंपी। अंतिम संस्कार वाले मृत व्यक्ति के विवरण पंजीकृत कर दाह-संस्कार की व्यवस्था करने को कही गई। समस्त थानाध्यक्षों को भी दलालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा।

RP सोनी ने कहा कि संविधान किसी को न सिर्फ गरिमा से जीवन जीने का अधिकार देता है, बल्कि मृत्यु के बाद गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार का अधिकार भी देता है। उन्होंने कहा कि मरणोपरांत भी व्यक्ति का ये अधिकार सुरक्षित रहे, इसलिए सभी श्मशान घाटों का निरीक्षण किया जाए। बता दें कि अस्पताल से श्मशान ले जाने के लिए भी रुपए माँगे जाते हैं। दलाली के इस खेल में शव जलाने के लिए ही सिर्फ 5-8 हजार रुपए ले लिए जाते हैं।


‘राजस्थान पत्रिका’ ने इस सम्बन्ध में पड़ताल की तो पाया कि मुर्दाघर से लेकर श्मशान तक ये रैकेट सक्रिय है। इसमें शामिल लोगों का कहना है कि वे जान जोखिम में डाल ये सब कर रहे हैं, इसलिए इतने रुपए देने तो बनते हैं। 15 दिन में उदयपुर जिले में 200 से अधिक ऐसे अंतिम संस्कार हुए हैं। लकड़ी से लेकर अन्य समान तक के रुपयों में दलाली वसूली जाती है, जबकि नगर निगम ने लाश पहुँचाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था कर रखी है।

एक दलाल ने तो एक आईडी कार्ड भी लटका रखा था और उसने गर्व से बताया कि पिछली 4 पीढ़ियों से इस श्मशान घाट पर उसके ही परिवार का कब्ज़ा रहा है।





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