Breaking News

Maharashtra विधायक निवास के निर्माण में 300 करोड़ का घोटाला ?

महाराष्ट्र विधायक निवास के निर्माण में लागत 600 करोड़ से 900 करोड़ कैसे हो गयी,विपक्ष ने बढे हुए 300 करोड़ बढ़ने पर सवाल उठाये तो कांग्रेस ने कहा इसके लिए देवेन्द्र फडणवीस सरकार जिम्मेदार है.... 

अशोक चव्हाण,साभार https://www.dnaindia.com

दरअसल, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व राहुल और प्रियंका गांधी ने कोरोना संकट के बावजूद सेंट्रल विस्टा परियोजना को जारी रखने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। इसके जवाब में प्रदेश भाजपा कह रही है कि सेंट्रल विस्टा पर सवाल करने वाली महाराष्ट्र में सत्ताधारी कांग्रेसने  विधायक निवास का पुनर्निर्माण के लिए टेंडर क्यों जारी किया?

मनोरा विधायक निवास के पुनर्निर्माण के लिए 900 करोड़ रुपए टेंडर जारी करने को लेकर अब राज्य में विपक्षी दल भाजपा और सत्ताधारी कांग्रेस आमने-सामने आ गई है। भाजपा ने विधायक निवास परियोजना की लागत 600 करोड़ रुपए से बढ़कर 900 करोड़ रुपए होने पर सवाल उठाया है। भाजपा विधायक ने विधायक निवास के निर्माण में 300 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है।  

क्यों पैदा हुआ विवाद ?

प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके आधा सच ट्वीट कर के देश की जनता को गुमराह हरने की कोशिश करि थी,जिसे अब राहुल गांधी ने थोड़ा मसाला डालकर सवाल उठाया, प्रियंका गांधी किसे भी कर मोदी जी को बदनाम करने किओ कोशिश करती रहती है,इसीलिए उसने संसद भवन शब्द की बजाये प्रधानमन्त्री निवास शब्द लिखा,अब राहुल गांधी ने यह मुद्दा उठाया की कोरोना के लिए पैसे खर्च करने की बजाये सरकार संसद भवन क्यों बना रही है, मगर राहुल गांधी ने देश से यह नहीं कहा की महाराष्ट्र में भी तो विधायकों के लिए निवास का पुनः निर्माण हो रहा है,वह भी 900 करोडे में, 

इसीलिए महाराष्ट्र बीजेपी ने राहुल गांधी को आयना दिखते हुए इस पर सवाल उठाये की यहाँ भी तो निर्माण हो रहा है,साथ में 300 कैसे बढ़ गए उसपर भी सवाल उठाये, इस पर प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री अशोक चव्हाण ने सफाई दी है। चव्हाण ने कहा कि सेंट्रल विस्टा परियोजना और मनोरा विधायक निवास पुनर्निर्माण परियोजना में फर्क है। दिल्ली में फिलहाल संसद अस्तित्व में है और प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए आवास है। ऐसे में सेंट्रल विस्टा परियोजना का काम क्यों जारी रखना जरुरी है? 

लेकिन मुंबई में विधायकों को रहने के लिए आवास नहीं है। हर विधायक को मुंबई में रहने के लिए प्रति महीना एक लाख रुपए दिया जाता है। क्योंकि मनोरा विधायक निवास को ढहा दिया गया है। पूर्व की फडणवीस सरकार ने ही मनोरा विधायक निवास पुनर्निर्माण का फैसला लिया था। 

300 करोड़ कैसे बढ़ गए ?

वहीं भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने कहा कि मनोरा विधायक निवास पुनर्निर्माण परियोजना की लागत 600 करोड़ रुपए से बढ़कर 900 करोड़ रुपए कैसे हो गई? सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए। भातखलकर ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर टेंडर रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने टेंडर रद्द नहीं किया तो मैं चीफ विजिलेंस कमिश्नर से इसकी शिकायत करूंगा। 

भातखलकर ने कहा कि कांग्रेस कि अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनकी पार्टी कांग्रेस सेंट्रल विस्टा परियोजना के खिलाफ दिन रात बात कर रही है तो महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना संकट के दौरान विधायक आवास के लिए 900 करोड़ रुपए का टेंडर क्यों जारी किया है? 

भातखलकर के आरोपों पर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि राज्य सरकार को भाजपा के उपदेश की आवश्यकता नहीं है। कोरोना काल में जनता और राज्यों को मदद करने के बजाय खुद के लिए सेंट्रल विस्टा में आलीशान आवास बनाने वाले मोदी को इस उपदेश की जरूरत है। सावंत ने कहा कि तत्कालिन फडणवीस सरकार ने मनोरा विधायक निवास का पुनर्निर्माण का फैसला 2018 में लिया था। इसका निर्माण कार्य पहले ही हो जाता। लेकिन फडणवीस सरकार के समय इसमें घोटाला हुआ। इससे निर्माण कार्य में देरी हुई और राज्य सरकार का 700 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। क्योंकि विधायकों को रहने के लिए हर महीने 3.5 करोड़ दिए जाते हैं। भाजपा विधायकों को भी हर महीने एक लाख रुपए मिलते हैं।  

एनबीसीसी की बजाय पीडब्लूडी को सौपा गया निर्माण कार्य

इससे पहले पूर्व की भाजपा सरकार ने मनोरा विधायक निवास का पुनर्निर्माण नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) से कराने का फैसला किया था। लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद महाविकास आघाड़ी सरकार ने 8 दिसंबर 2020 को मनोरा विधायक निवास का पुनर्निर्माण एनबीसीसी के बजाय राज्य के पीडब्ल्यूडी से कराने का फैसला लिया था। 

जनता का सवाल: फडणवीस सिर्फ 5 साल रहे मुख्यमंत्री पद पर,मगर उसके पहले की सरकारों ने क्या करा विधायकों के निवास के लिए,और एक लाख रुपिया किराया क्यों ? सवाल कांग्रेस को पूछती है और मुख्यमंत्री से निवेदन करती है की आप जांच करे की 600 करोड़ का 900 करोड़ कैसे हुआ ? क्या वाकही 300 करोड़ का घोटाला है ?





कोई टिप्पणी नहीं

आपको किसी बात की आशंका है तो कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखे