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ऑक्सीजन पर नौटंकी के बाद केजरीवाल ने करि Vaccine पर गन्दी राजनीति: बीजेपी ने खोली पोल

अरविन्द केजरीवाल पढ़ालिखा है की अनपढ़ वह संदेह होना तय है मनीष सिसोदिया द्वारा पत्र जारी करने के बाद, किसी योजना बनाने के पत्र को भला ऑर्डर का पत्र कैसे कह सकते है ? 
केजरीवाल की छिछोरी राजनीति : साभार https://hindi.opindia.com

राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन संकट पर खूब जूठ फैलाया,अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए गन्दी राजनीति करी,जब कोर्ट ने ऑक्सीजन सप्लाय का ऑडिट करने का आदेश दिया तो ऑक्सीजन की नौटंकी बंद करके अब आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार वैक्सीनेशन पर राजनीति कर रही है। और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार मई 10, 2021 को केंद्र सरकार पर ऑर्डर किए गए वैक्सीन की आपूर्ति न करने के लिए निशाना साधा, 

सिसोदिया ने दावा किया कि दिल्ली सरकार ने 18-44 आयु वर्ग के लोगों के लिए मैन्युफैक्चरर्स से वैक्सीन की 1.34 करोड़ खुराक देने का ऑर्डर दिया था, लेकिन केंद्र ने मई महीने में उन्हें केवल 3.5 लाख खुराक आवंटित की।

सिसोदिया ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल द्वारा किए गए दावों को दोहराते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार ने अप्रैल में फैसला किया कि राज्यों को सीधे वैक्सीन निर्माताओं के ऑर्डर दिए जा सकते हैं, तो अरविंद केजरीवाल सरकार ने 18-44 आयु वर्ग में लोगों के लिए 1.34 करोड़ खुराक का ऑर्डर दिया।

पत्र की प्रतियों को ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र ने अब उन्हें बताया है कि दिल्ली में मई में केवल 3.5 लाख खुराक ही मिल सकती है।

अपने ट्वीट में, दिल्ली के डिप्टी सीएम ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा झूठ की राजनीति कर रही है और दिल्ली सरकार पर केवल 5.5 लाख वैक्सीन खुराक देने का ऑर्डर देने का झूठा आरोप लगा रही है।’ डिप्टी सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार ने उन्हें टीकों के ‘ऑर्डर किए गए’ डोज प्रदान करने से मना कर दिया है।

भाजपा ने AAP की छिछोरी  राजनीति का दिया जवाब देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार नाजुक हालत दिखाने के लिए झूठ का सहारा ले रही है। उन्होंने केजरीवाल सरकार पर शहर में ‘अद्वितीय कोविड -19 संकट’ के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी दो पत्रों की प्रतियों को साझा करके साबित किया कि केजरीवाल सरकार द्वारा किया जा रहा दावा वास्तव में झूठा है और केवल केंद्र सरकार को बदनाम करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पत्र में, दिल्ली सरकार ने स्पष्ट शब्दों में दो निर्माताओं से वैक्सीन की खरीद के लिए केवल अपनी मंशा व्यक्त की थी। (तो क्या कोई भी चीज खरीद करने के विचार या चर्चा को ऑर्डर समझते है केजरीवाल ?)

पात्रा ने कहा कि भारत सरकार को 26 अप्रैल को लिखे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दिल्ली सरकार की योजना क्रमशः भारत के सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक से कोविशिल्ड और कोवैक्सिन की 67 लाख खुराक की खरीद की है। पात्रा ने कहा कि इसमें ऑर्डर देने की बात नहीं है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “आप सरकार द्वारा जारी किए गए इन दोनों पत्रों को ध्यान से पढ़ेंगे, तो आप पाएँगे कि ये सीएम केजरीवाल के कहे अनुसार 1.34 करोड़ वैक्सीन ऑर्डर करने का पत्र नहीं हैं। इसमें योजना बनाने की बात लिखी है, जिसे ऑर्डर के रूप में पारित नहीं किया जा सकता।”

पत्र को करीब से देखने से यह स्पष्ट होता है कि संबित पात्रा ने जो कहा वह वास्तव में सही है। पत्रों में उल्लेख है कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ‘खरीद करने की योजना’ बना रही है। किसी भी पत्र में यह उल्लेख नहीं है कि उन्होंने निर्माताओं को ऑर्डर दिया है, जैसा कि वे अब दावा कर रहे हैं।


दिलचस्प बात यह है कि जब मनीष सिसोदिया ने उपरोक्त स्क्रीनशॉट साझा किए, तो उन्होंने ‘कोक्सैक्सिन और कोविशिल्ड की 67 लाख की खरीद को रेखांकित किया, लेकिन ‘प्लानिंग’ शब्द को आसानी से छोड़ दिया, जिसमें कहा गया कि दिल्ली सरकार ने ऑर्डर नहीं दिया था, बल्कि सिर्फ विचार कर रही थी।

मनीष सिसोदिया ने दावा किया, “हमारे आदेश के ठीक बाद, केंद्र ने हमें एक पत्र भेजा जिसमें कहा गया है कि मई में दिल्ली को केवल 3.5 लाख खुराक मिल सकती है जिसमें कोवैक्सिन की 92,840 खुराक और कोविल्ड की 2,67,690 खुराक शामिल हैं। वैक्सीन कंपनियों ने तब तक जवाब नहीं दिया था। बीजेपी झूठ बोल रही है कि हमने केवल 5.50 लाख खुराक का ऑर्डर दिया। हमने 1.34 करोड़ खुराक का ऑर्डर दिया था।” हालाँकि दिल्ली सरकार द्वारा लिखी गई चिट्ठी अलग ही कहानी कहती है।

मेडिकल ऑक्सीजन पर अरविंद केजरीवाल की छीछालेदर राजनीती 

अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने शहर में ऑक्सीजन की आपूर्ति के बारे में एक बड़ी चुनौती बनाई थी और संकट के लिए केंद्र पर दोषारोपण किया था। इस मामले को ऐसे स्तर पर ले जाया गया कि दिल्ली HC और फिर सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।

केजरीवाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में संकट से उभरने के लिए दिल्ली को कम से कम 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की दैनिक आपूर्ति की जरूरत है। उन्होंने केंद्र पर उन्हें पर्याप्त चिकित्सा ऑक्सीजन प्रदान नहीं करने का आरोप लगाया। जब केंद्र सरकार ने दिल्ली में ऑक्सीजन की वास्तविक माँग को जानने के लिए एक ऑडिट का अनुरोध किया, तो केजरीवाल सरकार ने अनुरोध को ठुकरा दिया।

वीडियो देखे : केजरीवाल पर दिल्हीवासियो की हत्या का मुकदमा क्यों नहीं चलना चाहिए ?

लेकिन अदालत के आदेशों के बाद 730 एमटी ऑक्सीजन के साथ शहर-राज्य की आपूर्ति होने के बाद, सीएम ने अचानक यू टर्न ले लिया और कहा कि राष्ट्रीय राजधानी की ऑक्सीजन की कमी की समस्या का समाधान हो गया है और उनके पास हजारों नए ऑक्सीजन बेड के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन है।

दिल्ही की जनता को और हाइकोर्ट क्यों केजरीवाल के कान नहीं पकड़ती ? यह सोचने वाली बात है,









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