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अब किसान नेताओं का लक्ष्य CM योगी को हराना, लगे 2022 चुनाव की तैयारी में

दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन के 6 महीने पूरे होने के बाद अब ‘किसान आंदोलन’ ने उत्तर प्रदेश को अपना लक्ष्य बनाया है। 

किसान आंदोलन योगी को हारने होगा https://newzbulletin.in

किसान संगठनों का अगला लक्ष्य अब ‘मिशन उत्तर प्रदेश’ है। उत्तर प्रदेश में 2022 में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में इसके पीछे की राजनीति समझी जा सकती है। ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने उत्तर प्रदेश में केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज़ करने की तैयारी शुरू कर दी है।

किसान संगठनों ने कहा है कि वो उत्तर प्रदेश सहित जिन भी राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे, वहाँ भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगे। पश्चिम बंगाल में वो ऐसा कर भी चुके हैं, जहाँ योगेंद्र यादव और राकेश टिकैत जैसों ने जाकर ममता बनर्जी की पार्टी TMC के लिए चुनाव प्रचार किया था। ‘ऑल इंडिया किसान सभा’ के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल चुनावी हार की भाषा समझते हैं, इसलिए किसानों के सामने अब यही एक विकल्प है। SKM के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि अब ये अभियान सरकार को उखाड़ फेंकने का अभियान बन गया है। व्यवस्था और शासन को बदलना ही उसका मुख्य लक्ष्य है।

वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार को कहा कि वो इस ग़लतफ़हमी में न रहे कि ‘किसान आंदोलन’ ख़त्म हो जाएगा,  यह 2024 तक चलेगा, क्योंकि किसानों ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराए जाने के लिए मन बना लिया है। उन्होंने दावा किया कि ये आंदोलन और मजबूत होता चला जाएगा। हालिया पंचायत चुनावों में भाजपा द्वारा अपेक्षित प्रदर्शन न करने से किसान नेता उत्साहित हैं। 

राकेश टिकैत ने पंचायत चुनाव के नतीजों पर भी ‘किसान आंदोलन’ का असर होने का दावा करते हुए कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग भी अब MSP जैसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ हैं। इस साल पाँच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ प्रचार करने वाले किसान नेताओं ने मई 26 को ‘काला दिवस‘ के रूप में मनाया। 

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है, जो अपने कामों का लेखा-जोखा लेकर अगले साल के विधानसभा चुनाव में उतरेगी। भाजपा सालों बाद यूपी में सीएम के चेहरे के साथ चुनाव लड़ने जा रही है, ऐसे में इ उसके लिए प्रतिष्ठा का विषय है। दिल्ली-यूपी सीमा पर पहले ही किसानों ने कब्ज़ा कर रखा था, जहाँ वो अब भी बैठे हुए हैं। हालाँकि, ‘किसान आंदोलन’ को मिलने वाला जनसमर्थन कम हो गया है।

अब उत्तरप्रदेश की जनता और किसानो को देखना है की अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी खुद मारनी है या फिर अभी जो अच्छा चल रहा है,किसानो को फायदा देनेवाला कानून आया है उसका समर्थन करना है,


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