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परंपरा का सहारा लेकर मोदीजी,योगीजी और भारत को बदनाम करने निकले गिद्ध पत्रकार

तीर्थराज प्रयाग में पीढिय़ों से कई हिंदू परिवारों में शवों को गंगा नदी के किनारे रेती में दफनाने की परंपरा है। मगर कुछ स्वार्थी और मोदी,योगी विरोधी पत्रकार उस दफनाए गए शवों की ताजा तस्वीरों को कोरोना में हुई मौतों से जोड़कर इंटरनेट मीडिया में हो-हल्ला मचाया जा रहा है।

परंपरा हथियार बनाकर सरकार और देश को बदनाम करते पत्रकार ,साभार https://www.jagran.com

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर में हुई मौत को लेकर इंटरनेट मीडिया,TV पर दुष्प्रचार चल रहा है और इसमें तीर्थनगरी प्रयागराज का गंगा नदी के किनारे की तस्वीरें दिखा रहे है। प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर घाट पर 2018 में दफनाए गए शवों की अधिकांश तस्वीरों को इंटरनेट मीडिया पर वायरल करके उसको कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौत से जोड़ा जा रहा है। जबकि सच तो यह है कि 2018 में कोरोना का संक्रमण था ही नहीं।

और यहाँ लाशें दफना ना आज से नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही परम्परा है. यहाँ हर साल तक़रीबन 35000 से 40000 हजार पार्थिव शरीर को दफनाया या फिर गंगा में बहाया जाता है,  रविश कुमार और  यह पत्रकार 

फाफामऊ के साथ ही श्रृंगवेरपुर में ऐसे हजारों शव दफन हुए होंगे। यहां पर सफेद दाग, कुष्ठ रोग, सर्पदंश सहित अकाल मौतों से जुड़े शव लाए जाते हैं। आजकल यहां पर दफन कई वर्ष पुराने शव को दिखाकर उसको कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौत से जोड़ा जा रहा है। हद है कि इंटरनेट मीडिया पर ऐसी ही शवों की फोटो को वायरल  कर सनसनी फैलाई गई है।

इसके अलावा बिहार, बाबूगंज, उमरी, पटना, मोहनगंज, सेरावां, शकरदहा आदि गांव के लोगों ने भी शव को दफन करना या परंपरा बताया।

एक ही गांव के 50 मौतों में से 35 के शव दफनाए गए

श्रृंगवेरपुर से महज तीन किमी दूरी पर है गांव मेंडारा। यहां दस अप्रैल से लेकर दस मई तक के बीच करीब 50 लोगों की मौत हुई। नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान महेश्वर कुमार सोनू का कहना है कि इनमें से करीब 35 शव गंगा की रेती पर परंपरा के तहत दफनाए गए। मरने वालों में कोई कैंसर से पीडि़त था तो किसी की अस्थमा और हार्ट अटैक से मौत हुई। इनमें अधिकतर लोग 60 वर्ष से अधिक की उम्र के थे। हां, यह भी सच है कि किसी की कोरोना जांच नहीं हुई थी।

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शव दफनाते हैं शैव सम्प्रदाय के अनुयायी

शासन की रोक के बाद भी शैव सम्प्रदाय के अनुयायी यहां शव दफनाते आते हैं। घाट पर मौजूद पंडित कहते हैं कि शैव संप्रदाय के लोग गंगा किनारे शव दफनाते रहे हैं। यह बहुत पुरानी परंपरा है। इसे रोका नहीं जा सकता। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होंगी। 

भारत देश में लिबरल पत्रकारों की एक पूरी गेंग है,जो नरेन्द्र मोदी और योगी जी जैसे हिन्दू  नेता नहीं चाहते, उनको उनकी ऐयाशी और आर्थिक फायदा पहुंचाए ऐसे नेता चाहिए,इसीलिए रविश कुमार,बरखा दत्त ,राजदीप सरदेसाई,अभिसार,पुण्यप्रसून बाजपेयी ,आशुतोष जैसे कई पत्रकार मोदी और योगी को कैसे भी कर के बदनाम करना चाहते है, जनता के दिमाक में यह घुसाना चाहते है की इन्होने कोरोना महा मारी में कोई काम नहीं करा, जबकि राजस्थान ,महाराष्ट्र ,दिल्ही जहा की सरकार कोरोना के खिलाफ लड़ने में नाकामियाब रही और हमेशा बहाने बनाते रहे, 

योगी जो देशका सबसे बड़ा राज्य सबसे ज्यादा जनता फिर भी कोरोना संक्रमण को सफलता पूर्वक हेंडल कर रहे है इसीलिए उनको लगता है की आने वाले चुनाव में कही योगीजी फिरसे ना आ जाये, इसीलिए यह लोगो ने अब योगी जी को टारगेट करा है,

यह पत्रकार ऐसे है जिनको देश से कोई लेनादेना नहीं,उन्हें अपनी ऐय्याशी चाहिए,बड़ी होटल में रहना,सरकार के पैसो से विदेश की सफर करना ,शराब पीना ,और यह सब मोदीजी ने सत्ता  सम्हालते ही बंद कर दिया,जो इनको हजम नहीं हुआ,

जनता से निवेदन है की गलत खबरों को नजर अंदाज करे, और कोरोना महामारी से जितना चाहते हो तो टीवी पर खबरे देखना बंद करे, देश में जुठ फ़ैलाने वालो की संख्या बढ़ रही है ,तो आपकी भी फर्ज है की सत्य लोगो तक अवश्य पहुंचाए, धन्यवाद 






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