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GDP पर P Chidambaram के जूठे आलाप का Anurag Thakur ने डाटा के साथ दिया करारा जवाब: पढ़ें पूरी डिटेल

क्या भारतीय अर्थव्यवस्था आइसोलेटेड आइलैंड है? क्या दूसरी अर्थव्यवस्थाओं ने अपनी जीडीपी में संकुचन नहीं देखा? फ्रांस, जर्मनी, यूके, इटली, अमेरिका, रूस और कनाडा जैसे देशों को भी जीडीपी में संकुचन झेलना पड़ा। 

                                  कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम और केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर                                                                                             साभार :रिपब्लिकवर्ल्ड 

पूर्व वित्त मंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद पी. चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 पिछले 4 दशकों में देश की अर्थव्यवस्था का सबसे खराब साल रहा है। इस दौरान ग्रोथ रेट रिकॉर्ड निगेटिव दर्ज की गई,अधिकांश भारतीयों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है जो दो साल पहले थी। 

इसके अलावा चिदंबरम ने भारतीय वित्त मंत्रालय पर भारत की जीडीपी वृद्धि दर को लेकर जनता को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। इस पर केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक-एक बिन्दु पर अपने ट्विटर एकाउंट के माध्यम से पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को जवाब दिया है।  

अनुराग ठाकुर ने पी. चिदंबरम से प्रश्न किया, “क्या भारतीय अर्थव्यवस्था आइसोलेटेड आइलैंड है? क्या दूसरी अर्थव्यवस्थाओं ने अपनी जीडीपी में संकुचन नहीं देखा? फ्रांस, जर्मनी, यूके, इटली, अमेरिका, रूस और कनाडा जैसे देशों को भी जीडीपी में संकुचन झेलना पड़ा। लेकिन भारत में जारी सुधार प्रयासों के कारण जीडीपी ने वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में 24.4% संकुचन से चौथी तिमाही में 1.6% वृद्धि दर की यात्रा तय की।”

भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के अनुमान और वित्त मंत्रालय द्वारा ‘वी शेप’ ग्राफ थ्योरी पर पी. चिदंबरम को जवाब देते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि भले ही पूर्व वित्त मंत्री भारतीय उद्योगों, मझोले व्यापारियों और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों द्वारा अपने को संभालने के प्रयासों पर शंका करें लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक वृद्धि अनुमान एजेंसियों ने भारत की 12.5% वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। भारत एक मात्र ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसके लिए दो अंकों की वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया है। साथ ही वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक ग्राफ भी अपने ट्विटर एकाउन्ट पर पोस्ट किया जिसमें साफ तौर पर भारत की जीडीपी वृद्धि दर से संबंधित ‘वी शेप’ ग्राफ देखा जा सकता है। (वी शेप ग्राफ का तात्पर्य है कि जितना तेजी से भारत की अर्थव्यवस्था गिरी, उसी तेजी से भारत ने वृद्धि दर्ज की)

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि नकद हस्तांतरण के मुद्दे पर भी वर्तमान सरकार असफल रही और इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कोई सुधार देखने को नहीं मिला। इस पर अनुराग ठाकुर ने वर्तमान एनडीए सरकार और भूतपूर्व यूपीए सरकार की आँकड़ों के माध्यम से तुलना की।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि 2009-14 में यूपीए सरकार द्वारा नकद हस्तांतरण में खर्च किए गए 3.74 लाख करोड़ रुपए की तुलना में भारत सरकार ने 2014-19 के दौरान गेहूँ और चावल की खरीद के लिए 8 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। अनुराग ठाकुर ने बताया कि 5 सालों के दौरान जहाँ एनडीए सरकार ने 306.9 मिलियन टन धान और 162.7 मिलियन टन गेहूँ की खरीद की वहीं यूपीए सरकार ने 2009-13 के दौरान 176.8 मिलियन टन धान और 139.5 मिलियन टन गेहूँ की खरीद की थी।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि कैश ट्रांसफर पर सवाल पूछने वालों ने कितने बैंक एकाउंट खुलवाए? जनधन खातों का उदाहरण देते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि कैश ट्रांसफर के दौरान पूरा पैसा लाभार्थियों के खाते में ही जाए, मोदी सरकार ने 42 करोड़ जन धन एकाउंट खुलवाए।


ग्रोथ रेट पर भी वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने यूपीए सरकार के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के सामने उद्योगों में दर्ज की गई वृद्धि दर के आँकड़े भी रखे और 8 मूलभूत उद्योग क्षेत्रों में हो रही वृद्धि के बारे में भी जानकारी दी।

पी. चिदंबरम ने जीएसटी पर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा था। इस पर जवाब देते हुए अनुराग ठाकुर ने बताया कि अप्रैल 2021 में रिकॉर्ड तोड़ जीएसटी कलेक्शन रहा जो 1.44 लाख करोड़ रुपए था। यह अब तक का सबसे बड़ा कलेक्शन है। साथ ही अनुराग ठाकुर ने बताया कि यात्री वाहनों की बिक्री, तेल खपत, स्टील उत्पादन और सीमेंट उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी वृद्धि देखने को मिली है।

इसके अलावा भी अनुराग ठाकुर ने एक लंबे ट्विटर थ्रेड के माध्यम से पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के आरोपों का एक-एक करके जवाब दिया जिसमें मनरेगा और व्यापार लोन के लिए आवंटित राशि की जानकारी भी शामिल है। 

हालाँकि, पिछले कुछ समय से कॉन्ग्रेस और उसके वरिष्ठ नेता लगातार मोदी सरकार पर आर्थिक असफलता का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि मात्र भारत में आर्थिक वृद्धि दर में कमी देखने को मिली है। कई विकसित देशों में भी वृद्धि दर अपेक्षा और अनुमान से भी कम ही रही लेकिन फिर भी भारत को लेकर यही अनुमान लगाया जाता रहा कि भारत में 2021-22 के दौरान दुनियाँ में सबसे तेज जीडीपी वृद्धि दर रहेगी।  





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