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महान पत्रकार रवीशकुमार को दिमाग का दौरा पड़ा ?

21 जून 2021 को भारत भर में कोरोना के खिलाफ हुए बड़े टीकाकरण में सिर्फ 84 लाख लोगो को टिका लगया गया,यह की बड़ी बात नहीं,पोलियो टिका करण तो एक दिन में 17 करोड़ लोगो का हुआ था ?

 रविश कुमार :तस्वीर साभार samachar4media.com
रविश  कुमार नामक पत्रकार जिसे एक ज़माने में हम भीं सुनते थे,तब वह देश की बात करते थे, मगर 2014 के बाद से लगता है की उनको बार बार दिमाक का दौरा पड़ने लगा, वह देश की बात भूल गए और सिर्फ मोदी सरकार के खिलाफ बोलने लगे, और मोदीजी का विरोध करते करते अब देश का भी नुक्सान करने लगे है,

पीछले डेढ़ साल से देश कोरोना से परेशान है,कई लोगो की मौत हुई,लाखो लोग कोरोना से संक्रमित हुए, भारत  सरकार के देश के वैज्ञानिकों पर भरोसा और वैज्ञानिकों की महेनत के  स्वरुप एक साल में देश में पहली बार दो वेक्सीन का उत्पादन शुरू हो चुका, 

शुरुआत में वेक्सीनेशन को लेकर राज्य सरकार की मांग पर केंद्र सरकार ने राज्यों को वेक्सीनेशन की जिम्मेदारी सौंपी,मगर कोरी राजनीति के चलते विपक्ष की राज्य सरकार वेक्सिनेशन के मामले में सफल नहीं हुई,तब प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीजी ने अहम् फैसला लेते हुए वैक्सीनेशन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी भारत सरकार ने अपने हाथो में ली, और पुरे देश को फ्री वेक्सीन देने की योजना बनाई, और 21जून 2021 को देशभर में सबसे बड़ा वेक्सिनेशन हुआ जिसमे तक़रीबन 86 लाख से अधिक लोगो को एक ही दिन में वेक्सीन दी गयी, यह दुनिया भर के एक दिनके वेक्सीनेशन में सबसे बड़ा आंकड़ा था, जिसकी तारीफ़ होनी चाहिए, 

मगर रवीशकुमार जैसे बुद्धिशाली पत्रकार को उसमे भी कमी दिखाई पड़ी, उतनाही नहीं उन्होंने पोलियो के टीकाकरण से कोरोना  टिका कारन की तुलना करि, और लिखा सिर्फ 86 लाख लोगो को ही टिका दिया गया,इससे अच्छा तो पोलियो के टीकाकरण का मैनेजमेंट था की देश में एक दिन में 17 करोड़ लोगो को वेक्सीन दिया था,

अब यह बुद्धिशाली पत्रकार को कौन समजाये की  पोलियो का दो बून्द डोज  बच्चो को पिलाना होता है,जो आशा वर्कर पिलाती है, और वह भी घर घर जाकर बच्चो को पोलियो का डोज पिलाना होता है जो आशा वर्कर या कई भी पीला सकता है जिसने ट्रेनिंग ली है, मगर रविश कुमार को यह पता नहीं की कोरोना वेक्सीन इंजेक्शन के जरिये देना होता है जो सिर्फ डॉक्टर या नर्स ही लगा सकते है और वेक्सीन घर घर जाकर नहीं दी जाती, तो यह कौनसा मुर्ख पत्रकारत्व है की कोरोना वेक्सीन और पोलियो के दो बून्द डोज  तुलना करता है, यह तुलना कोई पागल या जिसे दिमाक का दौरा  बन्दा कर  सकता है,

रवीशकुमार मोदी जी को कोसने के चक्कर में वह भूल गया की एक बड़ा वर्ग उसे  सुनता है, कमसे काम उन्हें ऐसा बोलना और लिखना चाहिए जिसे किसीका भला हो, लोगो को वेक्सीन लेने में प्रोत्साहन मिले, ना की ऐसा कुछ लिखे जिससे लोगो का उत्साह काम हो और देश में नेगेटिविटी फैले, 

उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए की यह देश की वेक्सीन है,विदेश से नहीं लायी गयी, आज तक बीमारी फैलने  के सालो बाद भारत में वेक्सीन आती थी,यह पहली बार हुआ की वेक्सीन का उत्पादन देश में और वह भी एक साल के अंदर ही शुरू हो गया,इस बात की तारीफ़ कभी यह बुद्धिष्ट पत्रकार ने नहीं करि,ना कभी किसीको वैक्सीन लगाने प्रोत्साहित करा,

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन सोमवार (जून 21, 2021) को कोरोना टीकाकरण का 157वाँ दिन था और इस दिन 86,16,373 लोगों को कोरोना वैक्सीन दी गई। वैक्सीनेशन का अभी जो चरण चल रहा है, इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जून को की थी।

जहाँ मई 2021 में 7.9 करोड़ कोरोना वैक्सीन पूरे देश के लिए उपलब्ध था, जून में ये आँकड़ा 11 करोड़ हो गया है। राज्यों को पहले ही बता दिया गया था कि उन्हें कितनी वैक्सीन दी जानी है, जिससे उन्हें तैयारी करने में आसानी हुई। कल 15.42 लाख वैक्सीन डोज देने के साथ मध्य प्रदेश अव्वल रहा। कर्नाटक में 10.67 लाख और गुजरात में 5.02 लाख लोगों का 1 दिन में मुफ्त टीकाकरण हुआ।

गौर करने वाली बात ये है कि इन तीनों ही राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। हालाँकि, रवीश कुमार ने 1 दिन में करीब 86 लाख लोगों के वैक्सीनेशन में भी नकारात्मकता खोज ली। और कहा की इतने करोड़ के विज्ञापन देने के बाद सिर्फ 86 लाख लोगो को ही ......? 

रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “दस साल बाद गोदी मीडिया के प्रोपेगंडा और करोड़ों रुपए के विज्ञापन के सहारे सरकार पूरा ज़ोर लगाती है और एक दिन में 86 लाख टीके ही लगा पाती है। हो सकता है यह संख्या कुछ और बढ़ कर एक करोड़ तक पहुँच जाए, तो भी यह संख्या कितनी मामूली है। पोलियो अभियान की आलोचना करने वाले इसके चरण की धूल भी नहीं छू सके। वो भी तब जब छह महीने से ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि दुनिया का सबसे बड़ा टीका अभियान चल रहा है।”

रवीश कुमार ने न सिर्फ इस अभियान को फ्लॉप बता दिया, बल्कि ये भी कहा कि भारत जैसे देश में एक दिन में टीकाकरण का ये बेहद ही खराब आँकड़ा है। साथ ही उन्होंने इस बात से भी आपत्ति जताई कि टीकाकरण के मामले में न्यूजीलैंड से तुलना हो रही है। न्यूजीलैंड से तुलना सरकार के समर्थक नहीं, जून 2020 में सबसे पहले रवीश कुमार ने ही की थी। अब जब उसकी जनसंख्या से डेढ़ गुना ज्यादा लोगों को 1 दिन में भारत में टीका लगा, तो बताने में क्या बुराई है?

यानी रविश कुमार अपनी ही  बात पर यकींन नहीं रखता ,

अब जरा तथ्यों पर आते हैं। भारत में पोलियो के विरुद्ध टीकाकरण 1985 में शुरू हुआ था। रवीश कुमार इसके 27 वर्ष बाद बने रिकॉर्ड की बात कर रहे हैं। 1999 तक 60% नवजात शिशुओं को पोलियो अभियान के अंतर्गत लाया जा सका था, 14 वर्षों में। इस अभियान में WHO, रोटरी इंटरनेशनल, UNISEF और अमेरिका के डिजीज कंट्रोल विभाग सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत के साथ मिल कर काम किया था।

एक और बात, रवीश कुमार किस तरह भ्रम फैला रहे हैं इसे देखिए। जनवरी 2021 में मोदी सरकार ने ‘पोलियो रविवार’ मनाया था और इस दौरान 3 दिन में 11 करोड़ बच्चों को पोलियो की वैक्सीन दी गई थी। ‘पोलियो रविवार’ के दिन 9.1 करोड़ बच्चों को वैक्सीन लगी। ये इस दशक का पहला ही पोलियो अभियान था। 7 लाख बूथ पर वैक्सीनेशन हुआ। कोरोना के बीच इस तरह का अभियान एक बहुत बड़ी सफलता है।

क्या आपने रवीश कुमार को मोदी सरकार की पीठ थपथपाते हुए सुना कि उसने एक दिन में 9.1 करोड़ बच्चों को पोलियो की वैक्सीन लगा दी? नहीं।

इसीलिए अब लोग कहने और पूछने लगे की रविश कुमार नमक पत्रकार को दिमाक का दौरा पड़ा ?


 


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