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मदरसे में ब्लास्ट के बाद मर्द भागे, औरतों के होठ सिले: स्थानीयों का दावा- मौलाना बनाता था बम

ये घटना बिहार,बांका के नवटोलिया में हुई, एक मस्जिद के पास स्थित मदरसे में बम ब्लास्ट होने के बाद मौलाना की मौत हो गई। ये बम कहीं बाहर से नहीं आया था, बल्कि मदरसा में ही रखा हुआ था। फॉरेंसिक टीम ने भी अपनी जाँच में पाया कि मदरसा बम ब्लास्ट से उड़ा है। 4 लोग घायल भी हुए हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। आसपास के इलाके के सभी पुरुष घर छोड़ फरार हो गए हैं। और महिलाओं ने घटना को लेकर चुप्पी साध रखी है।

                    बांका में बम ब्लास्ट के बाद ध्वस्त हुई मदरसे की इमारत (फोटो साभार: दैनिक जागरण)

यह ऐसी जगह थी जहाँ आम दिनों में काफी चहल-पहल होती थी और सड़कें बालू ढोने वाले ट्रकों से भरी रहती थीं। नूरी मस्जिद इस्लामपुर के परिसर में स्थित मदरसे में धमाके से मौलाना अब्दुल सत्तार मोकिन की मौत के बाद उन सड़कों पर सन्नाटा है, मौलाना वहां 8 साल से रहता था,मगर ताज्जुब है की कोई उसे जानता नहीं था,

शाम को गाँव के बहियार में एक गाड़ी से मौलाना का शव फेंक कर कोई भाग गया, तब पुलिस को इसकी जानकारी हुई। मदरसा कमिटी के लोगों ने घटना के कई घंटों बाद भी पुलिस को कुछ सूचना नहीं दी। खड़िहारा और अमीनपुर जैसे गाँवों में जख्मी लोगों की तलाश के लिए छापेमारी की गई, लेकिन कोई नहीं मिला। 

मौत के सामान को सुरक्षित रखने के लिए भी मदरसे का सहारा लिया जाता रहा । कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि मौलाना बम बनाता था और 3 युवक उसका सहयोग करते थे। क्षेत्र में छोटी-छोटी बात पर बमबारी होती थी। भागलपुर से बारूद लाकर काम किया जाता था। पिछले साल शंकरपुर स्थित धर्मकाँटा पर बम ब्लास्ट हुआ था और पुलिस ने 7 अपराधियों को 65 हजार रुपए के साथ दबोचा था।

लोगों की चुप्पी के कारण मौलाना के साथियों का पता नहीं चल सका है। आम तौर पर गाँव में एक मौत होने पर भी मिलने-जुलने वालों का ताँता लगा रहता है। उक्त मौलाना झारखंड के देवघर स्थित सारठ के कालीजोत गाँव का रहने वाला था। परिजनों ने बताया कि उन्हें मदरसे के छत गिरने से मौलाना के घायल होने की बात बताई गई थी। उक्त मौलाना बच्चों को उर्दू और मजहब की शिक्षा देता था।

                                      ‘दैनिक भास्कर’ के बांका संस्करण में प्रकाशित खबर (साभार)

कुछ लोगों ने बताया कि जख्मी लोग एक ऑटो में बैठ कर फरार हो गए, वहीं मौलाना की मौत हो गई। पुलिस ने घटना की वैज्ञानिक तरीके से जाँच की बात कहते हुए बताया कि मौलाना के चरित्र को खँगाला जा रहा है। बम ब्लास्ट शक्तिशाली था, क्योंकि मदरसा का आधा हिस्सा सड़क के उस पार जा गिरा, अगर कोरोना काल का संन्नाटा ना होता तो बड़ी घटना हो सकती थी।

मदरसे की इमारत पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। डॉग स्क्वाड और फॉरेंसिक टीम को जाँच के लिए लगाया गया। ग्रामीणों ने पुलिस को गैस सिलिंडर से ब्लास्ट होने की बात बताई। घटनास्थल से 5 लिटर के 2 गैस सिलिंडर, बम की सुतरी, बारूद के अवशेष, और मौलवी का खून से सना कुर्ता बरामद किया। दोनों सिलिंडर सुरक्षित हैं। नवटोलिया और पड़ोस के मजलिसपुर में पत्थरबाजी और बमबारी आम बात थी।

कहा जा रहा है कि मदरसे के दफ्तर में एक ट्रंक के भीतर बम रखा हुआ था। आसपास के कई घरों में इस ब्लास्ट की वजह से दरारें आई हैं। मजलिसपुर और नवटोलिया के बीच कई सालों से विवाद चलता है। इसमें दोनों तरफ के कई लोगों की मौत हुई है। जून 2020 में दोनों गाँवों के बीच बमबारी और गोलीबारी हुई थी। कई लोग जेल भी गए थे। तब कम से कम 50 बम चले थे। हालिया बम ब्लास्ट के बावजूद इमाम की अनुपस्थिति में एक युवक ने अजान के समय मस्जिद में जाकर दैनिक प्रक्रिया को निभाया।

ताज़ा घटना में एक साथ कई बम फटने की आवाज़ आई और लोगों ने धुआँ भी देखा। पड़ोसी गाँव के लोगों ने ये जानकारी दी। इमाम का शव फेंक कर भागने वालों को भी पुलिस पकड़ नहीं पाई है। मदरसा कमिटी के लोग भी गायब हैं। घटनास्थल पर थानाध्यक्ष, एसपी, एएसपी और एसडीपीओ समेत कई बड़े अधिकारियों ने कैम्प किया। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही अब पुलिस आधिकारिक रूप से कारणों की पुष्टि करेगी





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