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कांग्रेस की नक़ल करते हुए केजरीवाल की हिंदू प्रेम वाली राजनीति

वीर सावरकर ने कहा था,जिस दिन हिंदू एक हो जाएँगे कॉन्ग्रेस के नेता उनके वोट के लिए कोट के ऊपर जनेऊ धारण करने लगेंगे। उनकी यह बात हाल के वर्षों में सच होते हुए दिखाई दी। 

                                                    तस्वीर साभार -ऑप इंडिया हिंदी 

चाहे वर्ष 2017 के गुजरात विधानसभा चुनावों के समय राहुल गाँधी ने मंदिर यात्राओं को एक नया आयाम दे डाला। रुद्राक्ष की माला धारण कर मंदिर मंदिर दर्शन करते नज़र आए। उन्हें जनेऊधारी हिंदू के रूप में पेश किया गया। प्रियंका गाँधी ने भी मंदिर यात्राएँ करती दिखाई पड़ती थी ।  

और तो और सर्वोच्च न्यायालय को राम जन्मभूमि केस की सुनवाई न करने की सलाह देने वाले कॉन्ग्रेसी नेताओं ने यह तक कह डाला कि वे हमेशा से अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बनने के पक्ष में थे। 

कांग्रेस की नक़ल करती AAP 

उत्तरप्रदेश चुनाव नजदीक आते ही आम आदमी पार्टी के नेताओंने जिस तरह से रंग बदला है वो पुराने कॉन्ग्रेसी नेताओं को भी शर्मिंदा कर देने के लिए काफी है।  

सोशल मीडिया पर आए दिन अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे आम आदमी पार्टी के नेताओं के हिंदू वोट के लिए किये गए राजनीतिक आचरण देखने लायक रहे हैं।

अनशन के दिनों में मंच पर लगे भारत माता का कटआउट हटाने से शुरू हुआ मुस्लिम तुष्टिकरण का राजनीतिक सफर इफ्तार पार्टी में केजरीवाल के सिर पर रखी जालीदार टोपी और कंधे पर पड़े अरबी गमछे और अयोध्या में मंदिर की जगह अस्पताल और यूनिवर्सिटी के निर्माण की अपील से होते हुए केजरीवाल की हनुमान भक्ति और अयोध्या में रामनामी ओढ़कर रामलला के दर्शन तक ही नहीं बल्कि अब दिल्ली के स्टेडियम में निर्माणाधीन श्रीराम मंदिर का रेप्लिका बनाकर दीपावली के शुभ अवसर पर उसमें पूजा करने तक पहुँच चुकी है।

एक समय था जब अरविन्द केजरीवाल अपना ज्ञान देते हुए कहते थे की रामलला का मंदिर बनाना चाहिए पर ‘किसी की’ मस्जिद गिराकर उस जमीन पर नहीं । एक समय था जब वे कहते थे कि; भाजपा कॉलेज की जगह मंदिर बनवाना चाहती है और ऐसा हुआ तो आपके बच्चे डॉक्टर इंजीनियर नहीं बल्कि पंडित बनेंगे। सिसोदिया अयोध्या में मंदिर की जगह लाइब्रेरी, अस्पताल और यूनिवर्सिटी चाहते थे। संजय सिंह ने तो रामनामी धारण करने से पहले अंतिम प्रयास के रूप में राम जन्मभूमि न्यास द्वारा जमीन की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बड़ा शोर मचाया। अब चुनाव् नजदीक आते ही उन्होंने अपना कलर बदल दिया,

आज लगभग हर विपक्षी दल हिंदुओं को प्रभावित करने के चक्कर में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की बात अब तक केवल आम आदमी पार्टी द्वारा की गई थी। यह गठबंधन हो पाएगा या नहीं यह तो समय बताएगा पर यदि गठबंधन की संभावना अभी तक है तो समाजवादी पार्टी के लिए यह नज़रअंदाज करना मुश्किल होगा कि केजरीवाल एंड कंपनी इस समय अपनी सारी कलाएँ केवल हिंदू वोट के लिए दिखा रही है। 

पार्टी के लिए समस्या यह भी है कि अगले वर्ष चुनाव केवल उत्तर प्रदेश में नहीं हैं बल्कि अन्य राज्यों में भी हैं और इस वजह से पार्टी के लिए सर्व धर्म राजनीति में समन्वय बना पाना आसान नहीं होगा। 

इन सबके बीच प्रश्न यह है कि AAP  सरकार में रहते हुए जिस स्तर का हिंदू प्रेम दिल्ली में दिखा रही है क्या उसी स्तर का उत्तर प्रदेश में दिखा सकती है? वैसे भी दिल्ली में पार्टी ने केवल हिंदू प्रेम ही दिखाया हो ऐसा नहीं है। उसके मुस्लिम नेता क्या करते रहे हैं यह किसी से छिपा नहीं है। मुस्लिम तुष्टिकरण के साथ-साथ पंजाब के सिख ‘किसानों’ द्वारा दिल्ली और आस-पास के इलाकों में की जाने वाली मनमानी का पार्टी ने जिस स्तर पर समर्थन किया है वह उत्तर प्रदेश के लोगों से छिपा नहीं है।

तमाम लोगों को यह लगता है कि विपक्षी दलों में केवल आम आदमी पार्टी ही खुलकर हिंदू प्रेम दिखा रही है इसलिए वह बाकी सबसे आगे रहेगी पर सच यही है कि लगभग हर पार्टी ऐसा करने के लिए तैयार है पर अपने भीतर के भ्रम से निकल पाना इन दलों के लिए आसान नहीं है। क्यूंकि जनता सब जानती है,

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