Breaking News

भारत के मिडियाको वाकहीमें लोकशाही का चौथा स्तम्भ कहना चाहिए ?

जो देश के मिडिया की वजह से देशमे अशांति फैलती हो,जो मीडिया सही बात को सही और गलत बात को गलत नहीं कह सकता उस मिडिया को लोकशाही का चौथा स्तम्भ कैसे मानना चाहिए ?

तस्वीर साभार theangle.in

मिडिया अशांति कैसे फैलाती है ?

कोई सड़क छाप नेता हिन्दू हो या मुस्लिम हो,कोईभी किसी के धर्म के प्रति कोई भद्दी कॉमेंट करता है तो तुरंत डिबेट शुरू करके बात का बतंगड़ बनाने लग जाते है,और पुरे दिन मुद्दे को जोरो से उछालना शुरू कर देते है,जिससे पुरे देश में हंगामा खड़ा हो जाता है,

हालही की बात करे तो नूपुर शर्मा वाला किस्सा क्या था ?

डिबेट में मुस्लिम नेता ने हिन्दू धर्म के लिए कुछ उलटा कहा तो सामने नूपुर शर्मा ने आयना दिखया,जबकि यही डिबेट में चेनल्स चाहती तो जैसे ही मुस्लिम नेता ने हिन्दू धर्म की बात करना शुरू करा तभी ही उसकी आवाज को बंद कर देते तो आज इतने लोगो की जान ना जाती, न्यूज़ चेनल्स की डिबेट अक्सर बन्दर और कुत्ते का खेल ही साबित होता है,और यह बात ख़ास कर कुछ प्राइवेट चेनल्स के लिए ही लागू होता है, दूरदर्शन पर भी डिबेट होती है मगर वहां कभी कुत्ते बिल्ली का खेल नहीं दिखाई पड़ता, 

मीडिया सही बात को सही और गलत बात को गलत नहीं कहता ?

जो देश का मिडिया जनता है की राहुल गाँधी,सोनिया गांधी, और भी अनेक नेता को कोई सवाल नहीं कर सकती और उनको जो जूठ बोलना हो वह बोलने भी देता हो,कभी जुठ बोलने वाले नेता को सचका आयना दिखाने की हिम्मत ना रखता हो उसे लोकशाही का चौथा स्तम्भ कैसे माने ? 
किसान कानून,NRC जैसे कानून पर हर रोज डिबेट करते रहे,मगर किसी भी पत्रकार ने उस जनता को जाकर यह कहने की हिम्मत नहीं करि की यह कानून देश के लिए क्यों अच्छा नहीं है, कभी किसी मिडिया ने मुफ्त की रेवड़ी बांटना गलत है वह बात जनता तक पहुंचने की कोशिश नहीं करि, यह जानते हुए की केजरीवाल जुठ की राजनीति करता है मगर किसी पत्रकार ने उसके कान पकड़ने की हिम्मत नहीं दिखाई। जब प्रधानमंत्री मोदीने १३ अगस्त से १५ अगस्त तक हर घर तिरंगा योजना घोषित करि थी तो केजरीवाल को १४ तारीख को ध्वज लहराने की अलग घोषणा करने की क्या जरूरत थी ? लाखो रूपया की पब्लिसिटी करने की क्या ज़रूरत थी ? क्यों किसी मिडिया ने यह सच उजागर नहीं करा ? राहुल गाँधी या सोनिया गाँधी जैसे नेता जब आपको एक इंटरव्यू नहीं देते तो उसके जुठ जनता तक पहुँचाने में मदद क्यों करते हो ? अगर सरकार की गलती हो तो उसे ईमानदारी से जनता तक पहुंचाए या विपक्ष जुठ बोलता है तो लोगो तक यह बात पहुँचाने की हिम्मत देश का मिडिया रखता है तभी उसे डेमोक्रेसी का चौथा स्तम्भ मानना होगा, नहीतो उनमे और जुठ बोलने वाले नेता में क्या फरक रहेगा ?

कोई टिप्पणी नहीं

आपको किसी बात की आशंका है तो कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखे